Rajasthan News: पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश राजीव बिजलानी ने नाबालिग से दुराचार के दो मामलों में मुय आरोपी व सह आरोपी की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत के समक्ष पीपलाज, रूपारेल निवासी समीम खान की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र दायर किया गया था।

उसके खिलाफ ब्यावर सिटी थाने पर 22 जुलाई 2025 को मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप है कि उसने नवीं कक्षा की छात्रा पर दोस्ती बनाने का दबाव डाला और फिर उससे बहला फुसलाकर गणेशपुरा, ब्यावर कैफे में ले गया और वहां उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाकर अश्लील फोटो वीडियो बना लिए।
इसके बाद वह उसे दिलवाला रोड स्थित मनवार रेस्टोरेंट पर कई बार लेकर गया और वहां भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। आरोपी की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र में निवेदन किया गया कि पीड़ित पक्ष से उसका राजीनामा हो गया है और कोई विवाद लंबित नहीं है। प्रकरण के अन्य आरोपियों की जमानत स्वीकार हो चुकी है। इसलिए उसे भी जमानत दी जाए।
विशेष लोक अभियोजक प्रशांत यादव ने इसका विरोध करते हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज करने का निवेदन किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रकरण की परिस्थितियों, किशोरियों के साथ बढ़ते हुए ऐसे आपराधिक कृत्यों व आरोपित अपराधों की प्रकृति व गंभीरता एवं पीड़िता की आयु को देखते हुए आरोपी का द्वितीय जमानत का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
एक अन्य मामले में अदालत में नाबालिग के अपहरण व उससे दुराचार के मामले में आरोपी सोनवा, थाना महिंदावास तहसील टोंक निवासी शहादत अली का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। आरोपी के खिलाफ 15 जून 2025 को पीड़ित की मां ने केकड़ी थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें बताया कि उसकी पुत्री की उम्र लगभग 14 वर्ष है। आरोपी शहादत अली उसकी पुत्री को अपने बेटे से शादी करने की नीयत से बहला फुसलाकर ले गया। आरोपी की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र में तर्क दिया गया कि पीड़िता के परिजन उसकी जबरन किसी और से शादी करना चाहते थे और उसने उसके साथ शारीरिक शोषण किया। वह उसको बचाना चाहता था।
विशेष लोक अभियोजक प्रशांत यादव ने इसका विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी पीड़िता के साथ अपने पुत्र का विवाह कराना चाहता था। इसलिए उसका अपहरण कर टोंक ले गए। उसके पुत्र ने पीड़िता से दुराचार भी किया। पीड़िता की उम्र महज 14 वर्ष है। ऐसे में जमानत याचिका खारिज की जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपराध की प्रकृति एवं गंभीरता एवं केस डायरी पर उपलब्ध पीड़िता के बयानों को ध्यान में रखते हुए आरोपी शहादत की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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