दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद ने अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अनुच्छेद-21 और UAPA की धारा 43D(5) को लेकर उठे कानूनी सवाल पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में आरोपी और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने एक बार फिर अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
उमर खालिद की ओर से दाखिल याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि उन्हें तब तक अंतरिम जमानत दी जाए, जब तक सुप्रीम कोर्ट एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न पर अपना फैसला नहीं सुना देता।
अनुच्छेद-21 और UAPA की धारा 43D(5) बना मुख्य मुद्दा
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट फिलहाल इस सवाल पर विचार कर रहा है कि क्या संविधान के अनुच्छेद-21, जो प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बावजूद प्रभावी रहेगा। उमर खालिद का तर्क है कि जब तक इस संवैधानिक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की जानी चाहिए।
दिल्ली दंगा साजिश मामले से जुड़ा है मामला
उमर खालिद पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र के मामले में UAPA और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में उनकी नियमित जमानत याचिकाएं पहले भी निचली अदालतों और उच्च न्यायालय में खारिज हो चुकी हैं।
शुक्रवार की सुनवाई पर रहेगी नजर
दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई इस लिहाज से अहम मानी जा रही है कि यह केवल उमर खालिद की अंतरिम जमानत तक सीमित नहीं है, बल्कि UAPA के तहत जमानत और अनुच्छेद-21 के बीच संतुलन से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर भी असर डाल सकती है। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट की कार्यवाही और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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