Rajasthan News: प्रदेश में पंचायत चुनावों का बिगुल बजने के साथ ही ग्रामीण अंचलों में सियासी पारा चढ़ने लगा है। मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्य अंतिम चरण में है और 25 फरवरी को इसके अंतिम प्रकाशन के साथ ही चुनावी तस्वीर और साफ हो जाएगी। हालांकि, इस बार चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों के लिए दो से अधिक संतान और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के प्रावधान सबसे बड़ी पहेली बने हुए हैं। सरकार की ओर से इन नियमों पर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण निवर्तमान सरपंचों और संभावित उम्मीदवारों में भारी असमंजस की स्थिति है।

बदल सकते हैं सियासी समीकरण
नियमों की सख्ती के कारण खैरथल-तिजारा जिले के कई दिग्गज और अनुभवी चेहरे चुनावी रेस से बाहर होते नजर आ रहे हैं। विशेषकर ‘दो संतान’ के नियम ने कई पूर्व जनप्रतिनिधियों की नींद उड़ा रखी है। यदि सरकार इन प्रावधानों को यथावत रखती है, तो कई पंचायतों में नए और युवा चेहरों को मौका मिलना तय है। वहीं, जिला परिषद के पहले गठन को लेकर भी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
शिक्षा बनाम अनुभव की बहस
ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता को लेकर बहस छिड़ गई है। सरकार का मानना है कि शिक्षित नेतृत्व से पंचायतों में पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा। पुराने जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि ग्रामीण विकास के लिए किताबी ज्ञान से अधिक ‘जनसरोकार’ और ‘जमीनी अनुभव’ की आवश्यकता होती है।
सरकार के स्तर पर मंथन जारी
सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार शैक्षिक योग्यता के प्रावधान को बरकरार रखने के पक्ष में है, जबकि दो से अधिक संतान वाले नियम में कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट देने पर विचार कर रही है। वर्तमान में ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त हैं, ऐसे में आम जनता भी जल्द से जल्द अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को देखना चाहती है।
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