Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर के एक व्यक्ति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए खारिज कर दिया है। जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता पति पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

दरअसल याचिकाकर्ता पति ने अदालत में दावा किया था कि उसकी पत्नी मई 2024 से अपने जीजा के साथ रह रही है और उनके बीच अवैध संबंध हैं। पति का आरोप था कि पत्नी ने अपनी पहचान छिपाकर एक अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया और अब उस बच्चे की जान को खतरा है। उसने गृह सचिव, एडीजी, और एसपी अलवर को बच्चे की सुरक्षा के निर्देश देने की गुहार लगाई थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति खुद यह स्वीकार कर रहा है कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, जब याचिकाकर्ता खुद मान रहा है कि बच्चा उसका नहीं है और बच्चा अपनी मां के पास है, तो अवैध हिरासत का मामला ही नहीं बनता।
मामले में मोड़ तब आया जब याचिकाकर्ता के वकील प्रकाश ठाकुरिया ने पुलिस जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए। पुलिस की पहली रिपोर्ट में महिला ने बच्चा पैदा होने से इनकार किया था, जबकि पड़ोसियों ने इसकी पुष्टि की थी। दूसरी रिपोर्ट में अस्पताल के रिकॉर्ड के आधार पर बच्चे के जन्म की बात स्वीकार की गई, लेकिन महिला अब भी इससे इनकार कर रही है।
पति के वकील का कहना है कि अगर अस्पताल रिकॉर्ड में बच्चा पैदा हुआ है, तो वह बच्चा गया कहां? उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट ने तथ्यों को सही ढंग से नहीं समझा है और अब वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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