Rajasthan News: कोटा के मेडिकल कॉलेज से आई खबर ने पूरे राजस्थान को हिलाकर रख दिया है। यहां बच्चे होने के बाद खुशी मनाने के बजाय परिवारों में मातम पसर गया। ऑपरेशन के बाद अचानक महिलाओं की किडनी फेल होने लगी। दो प्रसूताओं की मौत हो गई और 4 की हालत अभी भी बहुत नाजुक है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पर सीधा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान का कोई धनी-धोरी नहीं है और हेल्थ सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।

वार्ड में अचानक बिगड़ी तबीयत

अस्पताल के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में उस वक्त चीख-पुकार मच गई जब एक के बाद एक महिलाओं की तबीयत खराब होने लगी। डॉक्टरों को समझ ही नहीं आया कि आखिर माजरा क्या है। जांच में पता चला कि महिलाओं की किडनी काम करना बंद कर रही है। इनमें से एक महिला अभी वेंटिलेटर पर है और मौत से लड़ रही है। अस्पताल के सीनियर डॉक्टर अब सफाई देने में जुटे हैं, लेकिन सच तो ये है कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

कागजी जांच का नाटक बंद करो

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखते हुए कहा कि यह कोई मामूली घटना नहीं बल्कि एक बड़ी त्रासदी है। गहलोत के मुताबिक, SMS अस्पताल में लगी आग और खराब सिरप से हुई मौतों के मामले में किसी पर कार्रवाई नहीं हुई, इसीलिए सिस्टम से डर खत्म हो गया है। उन्होंने साफ कहा कि “मुख्यमंत्री जी, अब तो कुछ एक्शन लीजिए।”

क्या घटिया दवाइयों ने ली जान?

अस्पताल के अंदर से जो खबरें आ रही हैं, वो डराने वाली हैं। चर्चा है कि लोकल परचेज यानी स्थानीय स्तर पर जो दवाइयां खरीदी गईं, वो घटिया क्वालिटी की थीं। गहलोत ने भी इसी घटिया दवा के खेल की ओर इशारा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी निशुल्क दवा योजना का मकसद लोगों को बचाना था, लेकिन अब वही दवाइयां जान ले रही हैं।

मामलों ने खड़े किए सवाल

  • क्या ऑपरेशन के दौरान दी गई दवाइयों की पहले जांच हुई थी?
  • जब पहली महिला की हालत बिगड़ी, तो बाकी ऑपरेशन्स क्यों नहीं रोके गए?
  • अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को दबाने की कोशिश क्यों की?
  • चिरंजीवी और RGHS जैसी योजनाओं पर ब्रेक लगने से क्या आम आदमी अब सुरक्षित नहीं है?
  • क्या दोषियों पर वाकई कोई सख्त कार्रवाई होगी या फाइल बंद हो जाएगी?

पढ़ें ये खबरें