Rajasthan Nikay Chunav 2026 में अजमेर नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। भाजपा की अनामिका शर्मा ने कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 43-37 वोटों से हराकर महापौर पद पर कब्जा कर लिया। खास बात यह रही कि निगम चुनाव में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि भाजपा के पास 32 पार्षद थे। मेयर चुनाव में सभी 11 निर्दलीय पार्षद भाजपा के साथ गए और अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले।

11 निर्दलीयों ने बदला पूरा सियासी गणित
अजमेर नगर निगम के 80 पार्षदों ने मेयर चुनाव में मतदान किया। बहुमत के लिए 41 वोट जरूरी थे। वार्ड चुनाव में भाजपा के 32, कांग्रेस के 37 और 11 निर्दलीय पार्षद जीतकर आए थे। ऐसे में किसी भी दल के पास अपने दम पर मेयर बनाने के लिए जरूरी संख्या नहीं थी। मतदान के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले। यानी भाजपा के अपने 32 पार्षदों के अलावा 11 अतिरिक्त वोट उनके पक्ष में पड़े। कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले, जो कांग्रेस के कुल पार्षदों की संख्या के बराबर हैं।
पहली बार पार्षद बनीं अनामिका, सीधे मेयर की कुर्सी
अनामिका शर्मा वार्ड नंबर 3 से पहली बार पार्षद चुनी गई थीं। इसके बाद भाजपा ने उन्हें सीधे मेयर पद का उम्मीदवार बनाया। चुनाव में जीत के साथ उन्होंने अपने पहले ही कार्यकाल में अजमेर नगर निगम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हासिल कर ली। मेयर पद के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। दोनों दलों के बीच 41 के बहुमत आंकड़े को लेकर कई दिनों तक राजनीतिक गतिविधियां तेज रही थीं। चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करना दोनों दलों के लिए अहम था।
वोटिंग के दौरान भी हुआ हंगामा
मेयर चुनाव की वोटिंग के दौरान नगर निगम परिसर के बाहर हंगामे की स्थिति बनी। कांग्रेस पार्षद बस से निगम पहुंच रहे थे। पुलिस ने बस को चेकिंग के लिए बैरिकेड पर रोक लिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस हुई। मामला बढ़ने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। बाद में कांग्रेस पार्षदों की बस को निगम परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई।
वोटिंग से पहले भूपेंद्र सिंह को लेकर भी विवाद
मतदान शुरू होने से पहले भी निगम परिसर के बाहर राजनीतिक तनाव देखने को मिला। कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी किरण गढ़वाल के साथ पूर्व देहात कांग्रेस अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह निगम पहुंचे थे। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निगम परिसर में प्रवेश पर आपत्ति जताई। उनका सवाल था कि भूपेंद्र सिंह को अंदर जाने की अनुमति कैसे दी गई। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उन्हें निगम परिसर से बाहर कर दिया।
36 साल से BJP के कब्जे में रहा है अजमेर
अजमेर नगर निगम की राजनीति में भाजपा लंबे समय से प्रभावी रही है। इस बार वार्ड चुनाव में कांग्रेस ने 37 सीटें जीतकर भाजपा के 32 पार्षदों से बढ़त बनाई थी। इसके बावजूद मेयर चुनाव में भाजपा ने निर्दलीयों का समर्थन हासिल कर अपना बोर्ड बनाने का रास्ता साफ किया। इस नतीजे के साथ अजमेर में मेयर पद पर भाजपा का दबदबा बरकरार रहा। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह नतीजा इसलिए अहम है क्योंकि 2026 के वार्ड चुनाव में उसने भाजपा से ज्यादा सीटें जीती थीं।
अब बोर्ड गठन पर भी नजर
मेयर चुनाव के बाद अब अजमेर नगर निगम में बोर्ड गठन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। 43 वोट हासिल करने वाली भाजपा के पास मेयर पद के साथ बोर्ड बनाने के लिए भी पर्याप्त संख्या है। वहीं कांग्रेस के 37 पार्षदों के साथ निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने की उसकी कोशिश मेयर चुनाव के साथ समाप्त हो गई। अजमेर के स्थानीय निकाय चुनाव में 11 निर्दलीयों ने जिस तरह निर्णायक भूमिका निभाई, उससे साफ है कि इस बार वार्ड चुनाव के आंकड़ों और मेयर चुनाव के नतीजे में बड़ा अंतर रहा।
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