Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 309 शहरी निकायों में हुए चुनाव में भाजपा ने 10,235 घोषित वार्डों में 4,179 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 3,613 वार्ड मिले। निर्दलीयों ने भी 2,273 सीटों पर जीत दर्ज कर कई निकायों में समीकरण अपने पक्ष में प्रभावित किए।

इस चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की चुनावी रणनीति भी चर्चा में रही। चुनाव प्रचार से लेकर टिकट वितरण और नतीजों के बाद पार्षदों की गोलबंदी तक मुख्यमंत्री ने संगठन के साथ लगातार समन्वय किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक शर्मा ने वरिष्ठ नेताओं को संभागवार जिम्मेदारियां दीं और नियमित फीडबैक लिया। उन्होंने 10 नगर निगमों में चुनाव प्रचार के दौरान रोड शो भी किए।

10 नगर निगमों में चुनाव, जयपुर में BJP का बहुमत

राजस्थान में इस बार एक साथ 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाओं के लिए चुनाव हुए। कुल 10,245 पार्षद सीटों पर दो चरणों में मतदान हुआ। मतदान 9 और 11 सितंबर को हुआ, जबकि मतगणना 14 सितंबर को हुई। नगर निगमों के नतीजों में भाजपा ने जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। जयपुर में भाजपा 150 में से 78 वार्ड जीतकर बहुमत के आंकड़े तक पहुंची। अलवर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी रही। वहीं बीकानेर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला।

33 निकायों में निर्विरोध बोर्ड का दावा

चुनाव के दौरान निर्विरोध जीत भी भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा रही। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 33 निकायों में निर्विरोध चुनाव हुआ, जिनमें 30 पर भाजपा और एक पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार के निर्विरोध जीतने का दावा किया गया है। दो निकायों में कांग्रेस उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। यह आंकड़ा पिछले चुनावी दौर से तुलना के लिहाज से भी चर्चा में है। 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 11 निकायों में निर्विरोध चुनाव हुआ था, जबकि इस बार यह संख्या 33 बताई गई है।

भरतपुर और डीग में अलग तस्वीर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर और डीग में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा है। भरतपुर नगर निगम में भाजपा ने निर्विरोध बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की, जबकि पूरे क्षेत्र में कई निकायों में भाजपा ने बोर्ड गठन की स्थिति बनाई। हालांकि भरतपुर नगर निगम के वार्ड परिणामों की तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। उपलब्ध चुनाव परिणामों के मुताबिक 65 वार्ड वाले भरतपुर नगर निगम में निर्दलीयों ने 38 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 20 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं।

कांग्रेस की रणनीति और निर्दलीयों की भूमिका

चुनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने निर्दलीय पार्षदों को साथ रखने की चुनौती रही। कई निकायों में किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन के समीकरण में महत्वपूर्ण हो गए। भाजपा की ओर से नतीजों के बाद पार्षदों को एकजुट रखने और स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश की गई। वहीं कांग्रेस ने भी कई जगह अपने पार्षदों की गोलबंदी की।

भाजपा के लिए ढाई साल के काम की परीक्षा

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 को भजनलाल सरकार के करीब ढाई साल के कार्यकाल के बाद हुए बड़े शहरी चुनाव के तौर पर देखा गया। भाजपा का सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरना सरकार और संगठन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम है। हालांकि अलग-अलग शहरों और निकायों के नतीजे एक जैसी तस्वीर नहीं दिखाते। जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने बढ़त बनाई और कई जगह निर्दलीयों ने मजबूत स्थिति बनाई।

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