Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने वार्डों के नए सीमांकन को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव में कांग्रेस का सामना करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए वार्डों का गठन इस तरह किया गया है कि निकाय संस्थाओं पर कब्जा किया जा सके।

भाजपा में भी कम गुटबाजी नहीं

कांग्रेस की गुटबाजी को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रहलाद गुंजल ने कहा कि भाजपा में भी गुटबाजी कम नहीं है। उन्होंने खुद को पुराना भाजपाई बताते हुए दावा किया कि रोज करीब 10 भाजपा कार्यकर्ता उनसे बातचीत करते हैं।

गुंजल ने कहा कि भाजपा के कई लोग उनसे अंदर की नाराजगी साझा करते हैं और कहते हैं कि वह ही भाजपा को चुनाव में हरा सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं के ऊपर जुल्म हो रहे हैं और उनके बीच आतंक का माहौल है। उन्होंने कहा कि पहली बार शहरी निकाय चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा।

वार्ड सीमांकन पर क्या बोले गुंजल?

प्रहलाद गुंजल ने आरोप लगाया कि कोटा में वार्डों के सीमांकन में आबादी का संतुलन नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण में मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर है।

उनके मुताबिक कोटा दक्षिण में 41 हजार मतदाता हैं और वहां 30 वार्ड हैं। उन्होंने दावा किया कि कोटा दक्षिण में करीब 6 हजार की आबादी पर एक वार्ड बनाया गया है, जबकि कोटा उत्तर में एक वार्ड की आबादी करीब 30 हजार है।

गुंजल का आरोप है कि कुछ ऐसे वार्डों को मिलाकर एक कर दिया गया, जहां कांग्रेस की जीत की संभावना थी। वहीं, भाजपा के मजबूत क्षेत्रों में वार्डों को छोटा करके तीन वार्ड बनाए गए। उन्होंने इसे संस्थाओं को हथियाने की रणनीति बताया। गुंजल ने कहा कि अगर कांग्रेस की सरकार बनती है तो इन बदलावों को दोबारा किया जाएगा।

2011 की जनगणना से हो रहा विश्लेषण

पूर्व विधायक ने कहा कि कोटा राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के तेजी से बढ़ने वाले शहरों में शामिल है। उनका आरोप है कि भाजपा 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 2026 में शहर की आबादी करीब 39 प्रतिशत बढ़ चुकी है, लेकिन इसके मुताबिक वार्डों का आरक्षण तय नहीं किया गया।

स्कूलों में प्रवेश के आदेश पर भी निशाना

प्रहलाद गुंजल ने सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक लगाने वाले आदेश को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए सरकार से सवाल किया कि ऐसे आदेशों के जरिए वह अपनी कथित कमियों को कब तक छिपाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में भवन नहीं हैं और जहां भवन हैं, वहां शिक्षक और स्टाफ की कमी है। गुंजल ने कहा कि इन समस्याओं पर सवाल उठाने वालों को ही स्कूलों में जाने से रोका जा रहा है।

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