Rajasthan Non RAS to IAS Promotion: राजस्थान में गैर-RAS अधिकारियों को IAS में पदोन्नति देने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। पदोन्नति प्रक्रिया में देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। अदालत की सख्ती के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार को अहम फैसले लेने के लिए दिल्ली से निर्देशों का इंतजार रहता है।

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि चयनित अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़ी फाइल महीनों से लंबित क्यों है। डोटासरा ने दावा किया कि यह फाइल दिसंबर 2025 से सरकार के स्तर पर अटकी हुई है, जबकि जूली ने कहा कि उन्होंने जुलाई में भी इस देरी को लेकर सवाल उठाए थे।

डोटासरा बोले- दिल्ली की पर्ची के बिना फैसला नहीं लेती सरकार

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पूछा कि राजस्थान को फैसला लेने वाली सरकार आखिर कब मिलेगी? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिना दिल्ली की पर्ची और हाईकोर्ट की फटकार के कोई निर्णय नहीं ले पा रही है।

डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार का नेतृत्व अपने स्तर पर निर्णय लेने में असमर्थ नजर आता है। उनके मुताबिक, कमजोर नेतृत्व और लगातार निर्णय में देरी के कारण सरकार के कामकाज में बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप की स्थिति बन रही है।

10 महीने से क्यों अटकी है पदोन्नति की फाइल?

डोटासरा ने गैर-RAS अधिकारियों की IAS में पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी फाइल दिसंबर 2025 से राज्य सरकार के स्तर पर लंबित है। उन्होंने दावा किया कि नियमानुसार UPSC को 45 दिनों में अपनी टिप्पणी भेजी जानी थी।

हाईकोर्ट की ओर से 15 दिन में फैसला लेने के निर्देश दिए जाने के बाद डोटासरा ने पूछा कि चयनित अधिकारियों की फाइल इतने लंबे समय से किसके इशारे पर अटकी हुई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआई भर्ती, पंचायत और निकाय चुनाव तथा सरकारी स्कूलों की मरम्मत जैसे मामलों में भी सरकार की ओर से देरी हुई है। डोटासरा ने सवाल किया कि आखिर राजस्थान में फैसले लेने की जिम्मेदारी किसकी है और क्या मुख्यमंत्री को अपने स्तर पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है?

टीकाराम जूली ने भी दिल्ली से पर्ची आने का मुद्दा उठाया

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी एक्स पर पोस्ट कर सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि भजनलाल सरकार को हाईकोर्ट से कितनी बार फटकार सुननी पड़ेगी।

जूली ने कहा कि गैर-प्रशासनिक सेवाओं से IAS चयन के लिए UPSC की सूची को सरकार जनवरी से लंबित रखे हुए है। उनके मुताबिक, हाईकोर्ट ने अब 15 दिन में कानून के मुताबिक फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।

जूली बोले- एक प्रशासनिक फैसले में महीनों क्यों लग रहे?

टीकाराम जूली ने कहा कि उन्होंने जुलाई में भी सवाल उठाया था कि सरकार गैर-RAS अधिकारियों की पदोन्नति पर निर्णय क्यों नहीं ले रही है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार फैसला लेने में सक्षम नहीं है या हर निर्णय के लिए दिल्ली से निर्देश आने का इंतजार किया जा रहा है।

जूली ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार दिल्ली से आने वाली पर्चियों के सहारे समय काट रही है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि एक प्रशासनिक फैसले में आखिर महीनों क्यों लग रहे हैं। फिलहाल हाईकोर्ट के 15 दिन के निर्देश के बाद इस मामले में राज्य सरकार के फैसले का इंतजार है।

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