Rajasthan Panchayat Election 2026 से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। रविवार को जयपुर स्थित अपने सरकारी आवास पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने दावा किया कि गांवों में सरकार के खिलाफ प्रतिक्रिया है और पंचायत चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस सरकार की योजनाएं बंद करने, किसानों के 20-25 दिन काम करने वाले बयान और प्रदेश में सूखे की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

बंद योजनाओं को लेकर गहलोत ने सरकार को घेरा

गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार के समय चलने वाली योजनाएं गांव-गांव में लोकप्रिय थीं। उनके मुताबिक गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए चल रही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मौजूदा सरकार ने खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का नाम बदलना अलग बात है, लेकिन नाम बदलने के बाद उन्हें खत्म करना समझ से परे है।

20-25 दिन काम वाले बयान पर भी निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री के किसानों के 20-25 दिन काम करने वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री को किसानों के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसान केवल 20-25 दिन काम करते हैं तो बाकी समय क्या करते हैं। गहलोत के मुताबिक इस बयान का किसानों, गरीबों और गांवों में रिएक्शन है। गहलोत ने कहा कि गांवों के लोग पंचायत चुनाव में इसका जवाब देंगे। उन्होंने कांग्रेस के भारी बहुमत से जीतने का दावा भी किया।

निकाय चुनाव का अनुभव पंचायत चुनाव में आएगा काम

गहलोत ने हाल में हुए नगर निकाय चुनावों को लेकर भी बीजेपी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों में पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल की ऐसी स्थिति राजस्थान के इतिहास में पहले कभी नहीं बनी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे लोगों में आक्रोश है। गहलोत ने कहा कि पंचायत चुनाव में गांवों के लोग ज्यादा जागरूक हैं। निकाय चुनाव में प्रदेशवासियों को जो अनुभव हुआ, वह पंचायत चुनाव में काम आएगा।

सूखे को लेकर अभी से प्लान बनाने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान में बनी सूखे की स्थिति को भी गंभीर बताया। उन्होंने सरकार से अभी से कंटिंजेंसी प्लान तैयार करने की मांग की। गहलोत ने रोजगार, पेयजल और पशुओं के चारे की व्यवस्था पर ध्यान देने की बात कही। गहलोत ने नरेगा को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीणों के लिए रोजगार की गारंटी थी और काम नहीं मिलने पर मुआवजे का प्रावधान था। उनके मुताबिक अब काम खोलना राज्य सरकारों की इच्छा पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इंसानों और पशुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही पशुओं के लिए चारे का इंतजाम भी जरूरी होगा।

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