Rajasthan Panchayat Election 2026 की घोषणा से पहले संभावित उम्मीदवारों की जानकारी जुटाने को लेकर राजस्थान में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार जिलों के अधिकारियों के जरिए जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करवा रही है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा को उम्मीदवारों की सूची जुटाने के लिए सरकारी मशीनरी के सहारे की जरूरत नहीं है।

टीकाराम जूली ने सरकार पर लगाए आरोप

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के संभावित उम्मीदवारों की जानकारी किस उद्देश्य से मांगी जा रही है।

जूली ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए यह भी सवाल उठाया कि क्या संभावित उम्मीदवारों की जानकारी जुटाना सरकारी काम का हिस्सा है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और मामले में राज्य निर्वाचन आयोग से दखल देने की मांग की।

डोटासरा ने भी सरकार को घेरा

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर जिला कलेक्टर का एक पत्र पोस्ट करते हुए दावा किया कि पंचायत चुनाव से पहले संभावित प्रत्याशियों का डेटा जुटाया जा रहा है।

डोटासरा ने निर्वाचन आयोग से इस मामले की जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि संभावित जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों की सूची किसने और किस उद्देश्य से मांगी है।

मदन राठौड़ बोले- सरकारी मशीनरी की जरूरत नहीं

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस के दावे को भ्रम फैलाने का प्रयास बताया। राठौड़ ने कहा कि भाजपा को संभावित उम्मीदवारों की सूची जुटाने के लिए सरकारी मशीनरी का सहारा लेने की कोई जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, पार्टी के पास अपना संगठनात्मक नेटवर्क है, जिसके जरिए उम्मीदवारों को लेकर जानकारी जुटाई जा सकती है।

उम्मीदवारों के डेटा पर आमने-सामने BJP और कांग्रेस

पंचायत चुनाव की घोषणा से पहले संभावित उम्मीदवारों की जानकारी को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। कांग्रेस इसे सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को खारिज कर रही है।

मामले में कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से जांच की मांग की है। वहीं, भाजपा की ओर से कहा गया है कि पार्टी को संभावित उम्मीदवारों की जानकारी जुटाने के लिए सरकारी तंत्र पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।

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