Rajasthan Panchayat Election 2026: नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब राजस्थान के गांवों में पंचायत चुनाव की हलचल तेज हो गई है। बुधवार को जिला मुख्यालयों पर पंचायत समिति प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के पदों की आरक्षण लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही 457 प्रधान पदों का आरक्षण तय हो गया।

इनमें 221 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जयपुर और जोधपुर में महिला प्रधानों की संख्या सबसे ज्यादा रही है। वहीं डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ में प्रधान पद केवल एसटी वर्ग के लिए रहेगा।

457 प्रधान पदों का आरक्षण तय

जिला मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में 1403 जिला परिषद सदस्य, 457 प्रधान और 8245 पंचायत समिति सदस्यों के पदों का आरक्षण तय किया गया। पंचायत समिति प्रधानों में एससी के 79, एसटी के 93 और ओबीसी के करीब 56 पद आरक्षित किए गए हैं। आरक्षण की स्थिति सामने आते ही गांवों में संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई दावेदारों के लिए यह लॉटरी चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता खोल रही है तो कई पुराने दावेदारों के समीकरण बदल गए हैं।

जयपुर में 22 पंचायत समितियों का गणित

जयपुर जिले की 22 पंचायत समितियों में एक पद पर महिला प्रधान बन सकेंगी। वहीं उदयपुर की 20 पंचायत समितियों में एक भी प्रधान पद ओबीसी वर्ग के लिए नहीं होगा। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ जिलों में प्रधान पद केवल एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इससे इन जिलों में पंचायत चुनाव की दावेदारी का पूरा समीकरण आरक्षण के मुताबिक बदल गया है।

पंचायतों में 14,403 सरपंच चुने जाएंगे

राजस्थान में जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर पर कुल 1.51 लाख से अधिक वार्ड हैं। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंचों का चुनाव होगा। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। ऐसे में इन संस्थाओं में 75 हजार से अधिक महिलाओं के चुने जाने की संभावना है। इसके अलावा 1403 जिला परिषद सदस्य और 8245 पंचायत समिति सदस्य चुने जाएंगे। इन्हीं में से 41 जिलों में जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में प्रधान चुने जाएंगे। पंचायत चुनाव में 7 लाख से अधिक लोगों के चुनाव मैदान में उतरने का अनुमान है। जिला प्रमुख पदों का आरक्षण पहले ही तय हो चुका है।

अब सरपंच और वार्ड पंचों की बारी

बुधवार को प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों से जुड़े पदों की आरक्षण लॉटरी के बाद अब गुरुवार को उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंचों के पदों की लॉटरी निकाली जाएगी। प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियां और 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी के वार्डों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा है। ऐसे में सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद गांव-गांव में चुनावी दावेदारी और तेज होने की उम्मीद है।

41 जिला प्रमुखों का आरक्षण भी तय

41 जिला परिषदों में जिला प्रमुख पदों के लिए ओबीसी के 5, एससी के 8 और एसटी के 7 प्रतिनिधि चुने जाएंगे। चूरू, अजमेर, झुंझुनूं, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डीग, श्रीगंगानगर, झालावाड़, फलोदी, बीकानेर और कोटा में जिला प्रमुख पद सामान्य महिला श्रेणी के लिए रहेगा। वहीं बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, करौली, कोटपूतली-बहरोड़, राजसमंद, सिरोही और उदयपुर में जिला प्रमुख पद सामान्य श्रेणी में होंगे। सामान्य श्रेणी के पदों पर आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधि भी चुनाव लड़ सकेंगे।

लॉटरी के बाद गांवों में बढ़ी राजनीतिक हलचल

आरक्षण की तस्वीर साफ होने के साथ ही पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। जिन सीटों पर आरक्षण बदला है, वहां संभावित उम्मीदवारों को अब नए समीकरण के मुताबिक रणनीति बनानी होगी। गुरुवार को सरपंच और वार्ड पंच पदों की लॉटरी के बाद यह तस्वीर और साफ हो जाएगी।

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