जयपुर। राजस्थान में Rajasthan Panchayat Election 2026 की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आरक्षण को लेकर बड़ा कानूनी पेंच सामने आया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर और करौली जिलों की तीन ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए निकाली गई आरक्षण लॉटरी और उससे जुड़ी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया है।

अदालत ने संबंधित प्रशासन को नियमों के मुताबिक सात दिन के भीतर नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया और लॉटरी कराने के निर्देश दिए हैं। मामला आरक्षण में चक्रानुक्रम यानी रोटेशन के नियमों के पालन से जुड़ा है। हाईकोर्ट की एकलपीठ के न्यायाधीश आनंद शर्मा ने कहा कि केवल कागजी या गणितीय सटीकता को संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था का पूरा पालन नहीं माना जा सकता। अदालत के आदेश के बाद अब इन पंचायतों में पहले तय आरक्षण व्यवस्था बदल सकती है।
किन तीन पंचायतों की लॉटरी हुई रद्द?
हाईकोर्ट के आदेश का असर तीन ग्राम पंचायतों पर पड़ा है। इनमें भरतपुर जिले की पंचायत समिति उच्चैन की बरीघा ग्राम पंचायत शामिल है। इसके अलावा करौली जिले की हिंडौन तहसील की श्री महावीर जी और अकबरपुर ग्राम पंचायतों की आरक्षण लॉटरी भी निरस्त कर दी गई है।
इन पंचायतों में 24 सितंबर 2026 को सरपंच पद के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई थी। इसी प्रक्रिया को लेकर अदालत में याचिकाएं दायर की गई थीं।
7 चुनावों के रिकॉर्ड से उठा आरक्षण पर सवाल
यह मामला रविंद्र सिंह और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं के बाद सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में आरक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्धारित रोटेशन व्यवस्था का पालन नहीं किया गया।
याचिका में प्रभावित पंचायतों के पिछले सात चुनावों का रिकॉर्ड भी सामने रखा गया। इसमें दावा किया गया कि तीन बार एक ही वर्ग, विशेष रूप से अनुसूचित जाति यानी SC, को लगातार प्रतिनिधित्व दिया गया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार इससे आरक्षण के चक्रानुक्रम का उद्देश्य प्रभावित हुआ।
हाईकोर्ट ने नियम-7 को क्यों माना अहम?
मामले में राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियमों के नियम-7 और संबंधित सरकारी सर्कुलर का विशेष महत्व है। यह व्यवस्था आरक्षण के चक्रानुक्रम यानी रोटेशन से जुड़ी है।
इसका उद्देश्य यह है कि पंचायतों में आरक्षण एक ही वर्ग के लिए लगातार न बना रहे। चुनाव दर चुनाव आरक्षण की श्रेणी बदलने की व्यवस्था से अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है। अदालत ने इसी व्यवस्था के पालन को जरूरी माना। सिर्फ जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय करना पर्याप्त नहीं माना गया।
हाईकोर्ट ने प्रशासन की प्रक्रिया पर उठाया सवाल
अदालत के मुताबिक संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था का पालन सिर्फ गणितीय गणना तक सीमित नहीं हो सकता। आरक्षण तय करते समय निर्धारित रोटेशन व्यवस्था को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसी आधार पर बरीघा, श्री महावीर जी और अकबरपुर ग्राम पंचायतों की सरपंच आरक्षण लॉटरी को निरस्त कर दिया गया।
गलती राज्य निर्वाचन आयोग की या जिला प्रशासन की?
इस मामले में आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया जिला स्तर पर होने के कारण सवाल प्रशासनिक स्तर की प्रक्रिया पर है। पंचायत चुनाव में आरक्षण और लॉटरी की प्रक्रिया जिला प्रशासन के स्तर पर नियमों के अनुसार कराई जाती है।
राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम और आचार संहिता से जुड़ी प्रक्रिया देखता है। ऐसे में इस मामले में अदालत के आदेश के बाद भरतपुर और करौली के जिला प्रशासन के सामने दोबारा आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी है।
अब सात दिन में फिर निकलेगी लॉटरी
हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग के साथ भरतपुर और करौली के जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिया है कि आदेश जारी होने के सात दिनों के भीतर नियम-7 के मुताबिक पूरी प्रक्रिया दोबारा पूरी की जाए। अब तीनों प्रभावित ग्राम पंचायतों में नए सिरे से आरक्षण तय होगा और फिर लॉटरी निकाली जाएगी। यह प्रक्रिया चुनाव कार्यक्रम और नामांकन की तैयारियों के बीच पूरी करनी होगी।
ऐसे में इन तीन पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की निगाहें अब नई आरक्षण लॉटरी पर रहेंगी। नए आरक्षण के बाद इन पंचायतों में सरपंच पद के लिए चुनावी समीकरण भी बदल सकते हैं।
पढ़ें ये खबरें
- वायरल नारा ‘एक कचौड़ी, दो समोसा…’ पर सियासतः शिवराज ने नारे को बताया समाज के लिए खतरनाक, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने, भोपाल के आंदोलन से जुड़ा है मामला
- फिरोजाबाद में टायर फैक्ट्री बनी आग का गोला, 5 किमी दूर तक दिखीं लपटें, काले धुएं से छाया अंधेरा
- CM साय का सिंगापुर दौरा: गार्डन्स बाय द बे के अधिकारियों के साथ हुई बैठक, कहा- बॉटनिकल गार्डन से बढ़ेगा टूरिज्म और रोजगार
- MLC चुनाव को लेकर PK का बड़ा दांव, शिक्षकों को 7वां वेतनमान और युवाओं को 10 हजार नौकरी का ऐलान
- Video: नेशनल हाईवे पर खड़े ट्रेलर में लगी भीषण आग, मची अफरा-तफरी
