Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव की घोषणा से पहले राजस्थान में सियासी हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर कांग्रेस के संभावित पंचायत चुनाव उम्मीदवारों की जानकारी सरकारी स्तर पर जुटाए जाने का आरोप लगाया है। जूली ने सवाल उठाया कि चुनाव शुरू होने से पहले ही संभावित उम्मीदवारों की डिटेल क्यों मांगी जा रही है। उन्होंने पूरे मामले की चुनाव आयोग से जांच कराने की मांग की है।

जिला प्रमुख से पंचायत समिति सदस्य तक की जानकारी जुटाने का आरोप

टीकाराम जूली ने बुधवार को वीडियो संदेश जारी कर यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि सरकारी स्तर पर यह डिटेल जुटाई जा रही है कि आगामी पंचायत चुनाव में कौन जिला प्रमुख, कौन प्रधान, कौन जिला परिषद सदस्य और कौन पंचायत समिति सदस्य का संभावित उम्मीदवार हो सकता है।

जूली ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि संभावित उम्मीदवारों की यह जानकारी किस उद्देश्य से चाहिए और इसे जुटाना किस सरकारी काम का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य पूरा करने के लिए किया जा रहा है।

चुनाव शुरू भी नहीं हुए और हार का डर?

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव अभी शुरू भी नहीं हुए हैं और क्या सरकार को अभी से हार का डर सताने लगा है। जूली ने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि उन्हें संभावित उम्मीदवारों की जानकारी कौन दे रहा है और यह जानकारी जुटाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

डराने-धमकाने के लिए तो नहीं जुटाई जा रही जानकारी?

जूली ने आशंका जताई कि संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने के बाद सरकारी कार्रवाई के जरिए उन पर दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संभावित उम्मीदवारों पर मुकदमे दर्ज कराने, नोटिस देने, रिकवरी निकालने या छापे जैसी कार्रवाई की जा सकती है। जूली ने यहां तक आशंका जताई कि किसी उम्मीदवार को इस तरह परेशान किया जा सकता है कि वह चुनाव में नामांकन तक दाखिल न कर सके। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि वहां कौन अधिकारी इस तरह के आदेशों की पालना कर रहा है। 

निकाय चुनाव का भी किया जिक्र

जूली ने हालिया नगर निकाय चुनाव का जिक्र करते हुए सरकार पर विपक्ष और विरोधियों पर सरकारी तंत्र के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता निकाय चुनाव में सरकार की भूमिका देख चुकी है। जूली का दावा है कि सरकार ने चुनाव में मिली हार को जीत के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र के इस्तेमाल से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। जूली ने कहा कि राजस्थान की जनता सब कुछ देख रही है और पंचायत चुनाव में इसका जवाब देगी।

चुनाव आयोग से जांच की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले में चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की है। जूली ने कहा कि आयोग को यह जांच करनी चाहिए कि संभावित पंचायत चुनाव उम्मीदवारों की जानकारी किसके निर्देश पर जुटाई जा रही है और इसके पीछे क्या उद्देश्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि संभावित उम्मीदवारों की सूची किसने मांगी, जानकारी कहां भेजी जानी है और इसका इस्तेमाल किस काम के लिए किया जाएगा।

डोटासरा ने भी सरकार पर साधा निशाना

इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और सरकार पर हमला बोला है। डोटासरा ने बुधवार शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के इशारे पर मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे अधिकारी संभावित प्रत्याशियों की जानकारी जुटाने से जुड़े आदेश जारी करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र किसी राजनीतिक दल का चुनावी कार्यालय नहीं है और सरकारी मशीनरी से किसी दल के संभावित प्रत्याशियों की निगरानी नहीं होनी चाहिए।

डोटासरा ने मांगा सार्वजनिक स्पष्टीकरण

डोटासरा ने सरकार से इस कथित आदेश और उसकी मंशा पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग से भी सवाल किया कि पंचायत चुनाव से पहले संभावित प्रत्याशियों की सूची मांगे जाने की प्रक्रिया किस तरह की चुनावी व्यवस्था का हिस्सा है।

डोटासरा ने आयोग से तत्काल जांच की मांग करते हुए पूछा कि संभावित प्रत्याशियों की सूची किसने मांगी, किस उद्देश्य से मांगी गई, जानकारी कहां भेजी जानी है और उसका इस्तेमाल किस काम में होगा।

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