Rajasthan Panchayat Election 2026: राजस्थान में चार चरणों में हो रहे पंचायत चुनाव के तीसरे चरण का मतदान मंगलवार को पूरा हो गया। प्रदेश के 27 जिलों की 116 पंचायत समितियों के 2,496 वार्डों में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस चरण में कांग्रेस के 6 लोकसभा सांसदों, 15 विधायकों और 9 पूर्व मंत्रियों की साख भी दांव पर रही। मतदान खत्म होने के साथ ही प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद हो गई है। अब चुनाव परिणाम बताएंगे कि इन नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में कांग्रेस को कितनी बढ़त दिलाई।

इस चुनाव को कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी ने प्रत्याशी चयन और टिकट वितरण में सांसदों, विधायकों, विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं और पूर्व मंत्रियों को खुली छूट दी थी। इन नेताओं ने अपने क्षेत्रों में उम्मीदवार तय करने से लेकर चुनाव प्रबंधन और प्रचार तक की जिम्मेदारी संभाली। ऐसे में अब नतीजों के आधार पर उनके राजनीतिक प्रभाव का आकलन होगा।
27 जिलों की 116 पंचायत समितियों में मतदान
तीसरे चरण में बांसवाड़ा, बारां, ब्यावर, भरतपुर, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, डीडवाना-कुचामन, डीग, धौलपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जालौर, झुंझुनू, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सलूंबर, सीकर, टोंक और उदयपुर में मतदान हुआ।
अब चुनाव परिणाम आने के बाद यह साफ होगा कि किस क्षेत्र में किस पार्टी के प्रत्याशियों को बढ़त मिली। कांग्रेस के लिए खास तौर पर उन क्षेत्रों के नतीजे अहम होंगे, जहां पार्टी के बड़े नेताओं ने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया था।
6 लोकसभा सांसदों के क्षेत्रों में भी हुई वोटिंग
तीसरे चरण में कांग्रेस के छह लोकसभा सांसदों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी मतदान हुआ। इनमें टोंक-सवाई माधोपुर से सांसद हरीश मीणा, झुंझुनू से बृजेंद्र ओला, श्रीगंगानगर से कुलदीप इंदौरा, दौसा से मुरारीलाल मीणा, चूरू से राहुल कस्वां और धौलपुर-करौली से भजनलाल जाटव के क्षेत्र शामिल हैं। हरीश मीणा के क्षेत्र में बामनवास, बोली, खंडार, मलारना डूंगर, देवली, मालपुरा, पचेवर, पीपलू और उनियारा पंचायत समितियों में मतदान हुआ। वहीं बृजेंद्र ओला के क्षेत्र की गोठड़ा, गुड़ागौड़जी, नवलगढ़ और उदयपुरवाटी पंचायत समितियों में वोट डाले गए।
कुलदीप इंदौरा के क्षेत्र में राजियासर, सूरतगढ़ और विजयनगर पंचायत समितियों में मतदान हुआ। मुरारीलाल मीणा के क्षेत्र की लालसोट, लवाण, राजावतान, रामगढ़, पचवारा, शिवसिंहपुरा, सिकंदरा और सिकराय पंचायत समितियों में भी मतदाताओं ने वोट डाले। राहुल कस्वां के क्षेत्र में भानीपुरा, बीदासर, चांदगोठी, राजगढ़, सरदारशहर, सरदारशहर पूर्व, सिद्धमुख और भादरा में मतदान हुआ। वहीं भजनलाल जाटव के क्षेत्र की भुसावर, वैर, हिंडौन, सूरौठ और श्रीमहावीरजी पंचायत समितियों में वोटिंग हुई।
15 विधायकों की प्रतिष्ठा भी दांव पर
तीसरे चरण में कांग्रेस के 15 विधायकों के प्रभाव वाले इलाकों में भी मतदान हुआ। इनमें प्रमोद जैन भाया के अंता-केलवाड़ा, हरिमोहन शर्मा के तालेड़ा, डीसी बैरवा के दौसा और जाकिर गैसावत के मकराना क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा रामनिवास गावड़िया के परबतसर, शोभारानी कुशवाह के धौलपुर और सैपऊं, डूंगरराम गेदर के राजियासर और सूरतगढ़, अमित चाचाण के नोहर और पल्लू क्षेत्र में भी मतदान हुआ।
अनीता जाटव के हिंडौन, सूरौठ और महावीरजी, दीपचंद खेरिया के किशनगढ़ बास, ललित यादव के नीमराना, इंदिरा मीणा के बामनवास, वीरेंद्र चौधरी के दांतारामगढ़, दयाराम परमार के खेरवाड़ा, नयागांव और ऋषभदेव तथा अनिल शर्मा के सरदारशहर और सरदारशहर पूर्व क्षेत्र में भी वोट डाले गए।
9 पूर्व मंत्रियों के क्षेत्रों में भी हुई परीक्षा
कांग्रेस के नौ पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी पंचायत चुनाव के नतीजों से जुड़ी हुई है। हेमाराम चौधरी के धोरीमन्ना, गिरा और गुड़ामालानी क्षेत्र में मतदान हुआ। महेंद्रजीत सिंह मालवीय के बागीदौरा और वीरेंद्र बेनीवाल के लूणकरणसर क्षेत्र में भी मतदाताओं ने वोट डाले।
इसी तरह ममता भूपेश के सिकंदरा-सिकराय, महेंद्र चौधरी के नावां, जाहिदा खान के कामां और पहाड़ी क्षेत्र में मतदान हुआ। सुखराम बिश्नोई के सांचौर और सरवाना, रघुवीर मीणा के सलूंबर और सेमारी तथा परसादी लाल मीणा के लालसोट, रामगढ़, शिवसिंहपुरा और नांगल क्षेत्र में भी वोटिंग हुई।
जीत का श्रेय मिलेगा तो हार की जिम्मेदारी भी तय होगी
कांग्रेस ने निकाय चुनाव की तर्ज पर पंचायत चुनाव में भी टिकट वितरण और प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी स्थानीय प्रभावशाली नेताओं को सौंपी थी। सांसदों, विधायकों, विधानसभा प्रत्याशियों और पूर्व मंत्रियों की पसंद को टिकट तय करने में अहमियत मिली। चुनाव प्रचार और प्रबंधन में भी इन नेताओं की भूमिका प्रमुख रही।
ऐसे में चुनाव परिणाम उनके लिए केवल स्थानीय उम्मीदवारों की हार-जीत तक सीमित नहीं रहेंगे। पार्टी नेतृत्व ने प्रत्याशी चयन के दौरान ही इन नेताओं की जिम्मेदारी तय कर दी थी। जीत मिलने पर इसका श्रेय उन्हें मिलेगा, जबकि हार की स्थिति में जवाबदेही भी तय हो सकती है।
विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पकड़ का लिटमस टेस्ट
राजनीतिक विश्लेषक मनीष गोधा के मुताबिक, जब प्रदेश नेतृत्व ने निकाय चुनाव की तरह पंचायत चुनाव में भी सांसदों, विधायकों, विधानसभा प्रत्याशियों और पूर्व मंत्रियों को टिकट वितरण तथा उम्मीदवार चयन में फ्री हैंड दिया है, तो अब उनकी जिम्मेदारी भी बनती है कि वे प्रत्याशियों को जीत दिलाएं और अपने क्षेत्र में पार्टी को बढ़त दिलाएं।
उनका कहना है कि जिन नेताओं के क्षेत्रों में कांग्रेस को जीत मिलेगी, उनका राजनीतिक कद बढ़ सकता है। वहीं, हार की स्थिति में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठ सकते हैं। प्रदेश में करीब दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के नतीजे कांग्रेस के नेताओं की जनता के बीच पकड़ और संगठनात्मक ताकत का संकेत भी देंगे।
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