Rajasthan UCC Bill 2026: राजस्थान सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 को कैबिनेट से मंजूरी दे दी है। करीब 400 धाराओं वाले इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। अनुसूचित जनजाति परिवारों और संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। अब सरकार इस विधेयक को राजस्थान विधानसभा में पेश करेगी।

सभी धर्मों के लिए समान प्रावधान
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह और उससे जुड़े नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसके तहत अनुसूचित जनजाति परिवारों को छोड़कर सभी धर्मों के परिवारों के लिए तलाक को अदालत से मान्यता देने का प्रावधान किया गया है। किसी धर्म में पुनर्विवाह से जुड़ी ऐसी कुरीति मौजूद है, जिसे कानून के जरिए रोका जा सकता है, तो उसे रोकने का प्रावधान भी विधेयक में रखा गया है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त प्रावधान
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य लिव-इन संबंधों से जुड़ी शिकायतों में कमी लाना और ऐसे संबंधों को कानूनी दायरे में लाना है। प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार, 18 साल से कम उम्र के पार्टनर के साथ रहने पर पॉक्सो का मामला दर्ज होगा। वहीं, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की सूचना दिए बिना एक महीने से अधिक समय तक साथ रहने पर तीन महीने तक की जेल का प्रावधान किया गया है।
उत्तराधिकार में बेटा-बेटी को समान अधिकार
समान नागरिक संहिता विधेयक में उत्तराधिकार को लेकर भी अहम बदलाव प्रस्तावित हैं। इसमें पुत्र और पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रावधान है।
बिना वसीयत मृत्यु पर ऐसे होगा संपत्ति का हस्तांतरण
अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत मृत्यु होती है तो संपत्ति के हस्तांतरण के लिए उत्तराधिकारियों को तीन श्रेणियों में रखा गया है। पहली श्रेणी में जीवित पति या पत्नी, उनकी जीवित संतान, मृत बच्चों के पति या पत्नी और बच्चे तथा माता-पिता शामिल होंगे। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन, दिवंगत भाई-बहन के पति-पत्नी और बच्चे, माता-पिता के भाई-बहन, दादा-दादी और नाना-नानी को रखा गया है। तीसरी श्रेणी में पहली और दूसरी श्रेणी के अलावा अन्य रिश्तेदार शामिल होंगे। अगर किसी भी श्रेणी में कोई उत्तराधिकारी नहीं मिलता है, तो संपत्ति सरकार के पास चली जाएगी।
संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप विधेयक
राजस्थान सरकार ने द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) विधेयक-2026 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप तैयार किया है। विधेयक में विवाह, विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों के लिए समान कानूनी प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। अब इस विधेयक को राजस्थान विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसके बाद विधानसभा में चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी होगी।
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