Vulture Conservation in Rajasthan: राजस्थान में गिद्धों और अन्य शिकारी पक्षियों के संरक्षण के लिए वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने संयुक्त पहल की है। शनिवार को जयपुर स्थित वन मुख्यालय में वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों और संरक्षण संगठनों के प्रतिनिधियों ने ‘प्रोजेक्ट रैप्टर’ के उद्देश्यों और संरक्षण की प्राथमिकताओं पर चर्चा की। इस पहल के तहत पक्षियों की आबादी, उनके आवागमन, आवास के इस्तेमाल और विभिन्न आबादियों के बीच संपर्क का वैज्ञानिक अध्ययन करने पर जोर दिया गया।

गिद्धों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अध्ययन पर जोर
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरिजीत बनर्जी के मुताबिक, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में इस बैठक का आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ वन अधिकारियों, वन्यजीव विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और संरक्षण संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में ‘प्रोजेक्ट रैप्टर’ के उद्देश्यों, प्रस्तावित गतिविधियों और शिकारी पक्षियों के संरक्षण की प्रमुख प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा हुई। वैज्ञानिक अनुसंधान और नियमित निगरानी के जरिए संरक्षण संबंधी फैसलों को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।
पक्षियों की आबादी और आवागमन का होगा अध्ययन
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक ‘सी’ डॉ. आर. सुरेश कुमार और उनकी टीम ने परियोजना के उद्देश्यों, प्रस्तावित गतिविधियों और अपेक्षित परिणामों की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण में पक्षियों की आबादी का व्यवस्थित आकलन करने, उनके आवागमन के पैटर्न को समझने और प्राकृतिक आवास के इस्तेमाल का अध्ययन करने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही अलग-अलग आबादियों के बीच संपर्क का पता लगाने पर भी जोर दिया गया।
इन जानकारियों से पक्षियों की स्थिति और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर संरक्षण योजनाएं तैयार करने के लिए ऐसे अध्ययन महत्वपूर्ण माने गए।
विशेषज्ञों ने बताए गिद्धों के सामने मौजूद खतरे
कार्यक्रम में डॉ. क्रिस बोडेन ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में अपने वैश्विक अनुभव साझा किए। उन्होंने गिद्धों की आबादी के सामने मौजूद खतरों की पहचान करने और नियमित निगरानी तंत्र मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर लक्षित संरक्षण उपाय विकसित करने पर भी जोर दिया। बैठक में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति के सदस्य राजपाल सिंह, WWF-India और टाइगर वॉच के प्रतिनिधि धर्मेंद्र खंडाल समेत विभिन्न संरक्षण संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा के दौरान संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान और वन विभाग, अनुसंधान संस्थानों तथा संरक्षण संगठनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विचार किया गया।
लंबे समय तक संरक्षण के लिए समन्वित प्रयास
‘प्रोजेक्ट रैप्टर’ के जरिए राजस्थान में गिद्धों और अन्य शिकारी पक्षियों की स्थिति, वितरण, आवागमन और विभिन्न आबादियों के बीच संपर्क को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना में पक्षियों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों की पहचान और उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों व अन्य हितधारकों के बीच सहयोग मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस पहल में वैज्ञानिक अनुसंधान, जमीनी स्तर पर नियमित निगरानी और विभागीय समन्वय को साथ लेकर चलने पर जोर दिया गया। इससे संरक्षण से जुड़े फैसलों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तैयार करने और इन पक्षियों के दीर्घकालीन संरक्षण की दिशा में काम करने में मदद मिल सकती है।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी रहे मौजूद
बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरिजीत बनर्जी के अलावा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन) पवन कुमार उपाध्याय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (योजना) अनुराग भारद्वाज और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजेश गुप्ता समेत वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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