जयपुर। राजस्थान के वाणिज्य कर विभाग ने GST चोरी के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। विभाग ने 10 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगभग 2.85 करोड़ रुपये की संभावित कर अनियमितताओं का पता लगाया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजस्थान सरकार के वाणिज्य कर विभाग ने इस विशेष प्रवर्तन अभियान का उद्देश्य राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है, जैसे कि GST चोरी, फर्जी या अयोग्य इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करना, बिना इनवॉइस के माल की खरीद-बिक्री करना और व्यावसायिक टर्नओवर को छिपाना।

अधिकारी ने कहा, “यह अभियान दो महीने से अधिक समय से चल रहा है। इसी पहल के तहत, विभागीय टीमों ने हाल ही में जयपुर, अजमेर, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और फलोदी सहित विभिन्न स्थानों पर स्थित 10 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सर्वे और जांच की।”

उन्होंने बताया कि इन कार्रवाइयों में कुल 2.85 करोड़ रुपये की संभावित कर अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान, करदाताओं ने स्वेच्छा से लगभग 2.51 करोड़ रुपये जमा किए या रिवर्स (वापस) कर दिए।

हाल ही में की गई छापेमारी के बारे में जानकारी देते हुए अधिकारी ने बताया कि एक मामले में रिसॉर्ट निर्माण के लिए अयोग्य ITC का दावा किया गया था, जिसके तहत 55.26 लाख रुपये की राशि रिवर्स की गई। जयपुर के झोटवाड़ा में ‘स्टबबॉर्न रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ 12 अक्टूबर को की गई कार्रवाई के दौरान, रिसॉर्ट निर्माण के लिए दावा किए गए ITC की पात्रता की जांच की गई। इसके बाद करदाता ने 5,526,230 रुपये का ITC रिवर्स कर दिया।

इसी तरह, 13 अक्टूबर को जयपुर की सी-स्कीम में ‘AGRS वेंचर्स LLP’ के खिलाफ की गई कार्रवाई में, अचल संपत्ति के निर्माण से जुड़ा लगभग 1 करोड़ रुपये का अयोग्य ITC का मामला सामने आया। जांच के दौरान, करदाता ने 99.76 लाख रुपये का ITC रिवर्स कर दिया।

अधिकारी ने बताया कि अजमेर के पुष्कर रोड पर स्थित ‘असम टिम्बर एंड प्लाईवुड’ के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। वहां बिना उचित टैक्स इनवॉइस के माल बेचने और व्यावसायिक लेन-देन छिपाने का संदेह था।

विभागीय टीम ने स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया और संदिग्ध दस्तावेजों को जब्त कर लिया। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इसमें लगभग 8 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता सामने आई है। एक और मामला अजमेर के कैसरगंज स्थित ‘के सी एजेंसीज’ का है, जहां अधिकारियों का आरोप है कि ‘कंपोजिशन स्कीम’ के नियमों का उल्लंघन किया गया, ‘बिल ऑफ सप्लाई’ के बिना सामान बेचा गया और असल टर्नओवर को छिपाया गया।

अधिकारी ने आगे बताया कि कुछ अन्य फर्मों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

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