नालंदा। सांची के बाद अब बिहार का ऐतिहासिक और खूबसूरत शहर राजगीर देश का दूसरा और उत्तर भारत का पहला सोलर सिटी बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश के सांची की तर्ज पर राजगीर में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को घर-घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से हाल ही में राजगीर स्थित इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में एक भव्य सोलर मेले का आयोजन किया गया, जहां स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखने को मिला।
छतों पर सोलर पैनल लगाने का भारी क्रेज
राजगीर के नागरिकों में अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली के बिल को पूरी तरह शून्य करने की मुहिम को लेकर जबरदस्त दीवानगी दिख रही है। मेले में पहुंचे लगभग 250 से अधिक उपभोक्ताओं में से 53 लोगों ने मौके पर ही पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपना पंजीयन करवा लिया।
उप विकास आयुक्त सारा अशरफ और अनुमंडल पदाधिकारी सूर्य प्रकाश गुप्ता ने बताया कि राजगीर को पूर्णतः सोलर सिटी बनाने के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए एक अनूठी रणनीति बनाई गई है। इसके तहत शहर के सभी वार्डों और पंचायतों के बीच एक विशेष प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। जो वार्ड अपने क्षेत्र में सबसे अधिक सोलर पैनल लगवाएगा, उसे प्रधानमंत्री के संभावित राजगीर दौरे के दौरान विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ऋण संबंधी प्रक्रियाओं को त्वरित गति से पूरा करने के लिए जल्द ही विशेष ऋण शिविर भी लगाए जाएंगे।
खपत के बराबर सौर ऊर्जा उत्पादन
प्रशासन की योजना के अनुसार, पर्यटक नगरी राजगीर में जितनी बिजली की कुल खपत है, ठीक उसी अनुपात में सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा। इस लक्ष्य को पाने के लिए शहर के प्रमुख होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, निजी आवासों और सरकारी भवनों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक यूनिट पारंपरिक बिजली तैयार करने में औसतन आधा किलो कोयला जलता है, जिससे लगभग एक किलो ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है। सौर ऊर्जा को अपनाने से न केवल कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, बल्कि राजगीर की खूबसूरत पहाड़ियों और प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा।
सब्सिडी और आसान ऋण की सुविधा
मेले में पहुंचे उपभोक्ताओं को सोलर पैनल की लागत और वित्तीय गणित की पूरी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 3 किलोवाट का सिस्टम लगवाने पर केंद्र सरकार 78,000 और राज्य सरकार 20,000 का अनुदान दे रही है। इस प्रकार उपभोक्ताओं को कुल 98,000 की भारी-भरकम सब्सिडी सीधे तौर पर मिलेगी।
एकमुश्त राशि न होने की स्थिति में उपभोक्ताओं के लिए बैंकों द्वारा बेहद आसान किस्तों पर रियायती ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। मेले में विभिन्न सोलर वेंडर कंपनियों और बैंकों के स्टॉल लगाए गए थे, जहां विशेषज्ञों ने तकनीकी पहलुओं और वित्तीय मदद से जुड़े सवालों के जवाब दिए। कई पुराने उपभोक्ताओं ने मंच से अपने जीरो बिजली बिल के सुखद अनुभव भी साझा किए।

