लखनऊ. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और यूपी विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार (26 सितंबर 2026) देर रात निधन हो गया. उन्होंने लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGI) में अंतिम सांस ली. वे 74 वर्ष के थे. पिछले कुछ समय से उनका इलाज चल रहा था. उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.
इसे भी पढ़ें- यमुना एक्सप्रेस-वे बस हादसे को लेकर हाईकोर्ट सख्त, रात में बसों की जांच के आदेश
अखिलेश यादव ने जताया शोक
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष का निधन अत्यंत दुखद है. अखिलेश ने शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति मिलने की कामना की. सीएम योगी आदित्यनाथ और सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भी उनके निधन पर दुख जताया.
छात्र जीवन से समाजवादी आंदोलन से जुड़े
राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1946 को बलिया में हुआ था. उन्होंने टीडी कॉलेज, बलिया से पोस्ट ग्रेजुएशन और एलएलबी की पढ़ाई की. छात्र जीवन से ही वे समाजवादी विचारधारा से जुड़ गए थे. आपातकाल के दौरान उन्होंने संपूर्ण क्रांति आंदोलन में हिस्सा लिया और करीब 25 महीने जेल में रहे.
चंद्रशेखर से मुलाकात के बाद बढ़ा राजनीतिक कद
1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से हुई. जेल से रिहाई के बाद चंद्रशेखर उनके काम से प्रभावित हुए और उन्हें अपना करीबी साथी बनाया. इसके बाद राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर आगे बढ़ा. वे 8 बार विधायक रहे और मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे.
इसे भी पढ़ें- SIR विवाद के बीच ओम प्रकाश राजभर बोले- चुनाव आयोग ने अच्छा किया, विपक्ष को पच नहीं रही कार्रवाई
मंत्री और नेता प्रतिपक्ष भी रहे
राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया. 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री रहे. 2017 से 2022 तक वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे. 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा की केतकी सिंह से हार मिली थी. उनके निधन की खबर से बलिया और लखनऊ में सपा कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है.


