सुप्रिया पाण्डेय, रायपुर। छत्तीसगढ़ में राम वन गमन परिपथ का विकास तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के 10 प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थानों को अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने यह जानकारी दी।

संस्कृति मंत्री ने बताया कि राम वन गमन परिपथ के विकास के लिए शोध के आधार पर कुल 31 स्थानों का चयन किया गया है। पहले चरण में इनमें से 10 स्थानों को विकसित किया जाएगा। यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पहले चरण में इन स्थानों का होगा विकास
पहले चरण में रुद्रेश्वर महादेव मंदिर, रुद्री (धमतरी), शृंगी ऋषि-सप्तर्षि आश्रम, नगरी-सिहावा, खरौद, रामाराम और चिंतामीटर मंदिर (सुकमा), चंदन मिहीं, रामगढ़ और सीता बेंगरा (सरगुजा), रामझरना (रायगढ़), विष्णु मंदिर, रामपुर-जुनवानी (कांकेर), चित्रकोट शिव मंदिर और सीतामढ़ी-हरचौका को विकास के लिए चयन हुआ है।

पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए विकसित होंगी सुविधाएं
राम वन गमन परिपथ के तहत चयनित स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। स्थानीय पर्यटकों, साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछली सरकार के समय राम वन गमन परिपथ के जो काम अधूरे रह गए थे, उन्हें पूरा करने और पहले से निर्मित सुविधाओं का उपयोग सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। हरचौका और सीतामढ़ी के विकास पर भी काम होगा।
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