अजय सैनी, भिवानी. हरियाणा के पूर्व बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने अपने राजनीतिक भविष्य, चुनावी रणनीतियों और राज्य व देश की वर्तमान राजनीति पर खुलकर अपनी राय रखी। भिवानी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने साफ किया कि वे कोई नई क्षेत्रीय पार्टी नहीं बनाएंगे, क्योंकि अब देश की राजनीति टू-पार्टी सिस्टम (कांग्रेस या भाजपा) की ओर बढ़ चुकी है और क्षेत्रीय दलों का दौर अब लगभग समाप्त हो गया है।
चुनावी राजनीति में अपनी भागीदारी को लेकर रणजीत चौटाला ने कहा कि समय और परिस्थितियों के हिसाब से निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा चुनाव लडऩा हुआ तो वे हिसार से ही चुनाव लड़ेंगे। वही विधानसभा चुनाव लडऩे की स्थिति में सिरसा जिले की सीटें जैसे कालांवाली, ऐलनाबाद, डबवाली या रानियां उनके विकल्प हो सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में किसी भी नेता को सीटें या सम्मान उसकी जमीनी ताकत और वोट बैंक के आधार पर ही मिलता है।
चौधरी देवीलाल परिवार के एकजुट होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आम जनता और समर्थकों की यही दिली इच्छा थी कि पूरा परिवार एक मंच पर आए। ओमप्रकाश चौटाला के निधन के समय भी लोगों की यही भावना थी और वे स्वयं भी इसके पक्षधर थे। अजय चौटाला ने भी पहल करते हुए साथ आने की सहमति जताई थी, लेकिन अभय चौटाला द्वारा की गई अनावश्यक व उल्टी बयानबाजी के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि पुराने दौर में लोग जुबान के पक्के होते थे, लेकिन आज की राजनीति में स्वार्थ और शॉर्टकट ज्यादा हावी हो चुके हैं।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का इतिहास कई बार टूटने का रहा है और हरियाणा में आज भी भयंकर गुटबाजी है। उन्होंने सिरसा और अन्य सीटों का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर टांग खिंचाई का कल्चर बहुत ज्यादा है, जहां एक नेता दूसरे के प्रत्याशी को हराने में लग जाता है। वही भाजपा के संगठन को मजबूत बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा में नियमित बैठकें और अनुशासन होता है, जो उन्हें अन्य दलों से अलग बनाता है।
हरियाणा में बढ़ते अपराध और व्यापारियों से रंगदारी मांगे जाने के मुद्दों पर रणजीत चौटाला ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह देते हुए कहा कि जैसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सख्ती से काम कर रहे हैं, वैसे ही हरियाणा में भी अपराधियों और गुंडागर्दी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। विपक्षी नेताओं पर ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना किसी आधार या गैर-अनुपातिक संपत्ति के जांच एजेंसियां किसी के पास नहीं जातीं; एजेंसियां कानून और वित्तीय नियमों के तहत ही काम करती हैं।
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