संजीव, सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत में भारतीय किसान यूनियन की बड़ी बैठक के दौरान किसानों ने महंगाई, एमएसपी और सरकार की नीतियों को लेकर जमकर हुंकार भरी। गोहाना रोड स्थित छोटूराम धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष किसान रतनमान ने सरकार पर किसानों की अनदेखी और युवाओं को बेरोजगारी की ओर धकेलने के आरोप लगाए।

इस बैठक में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष किसान रतनमान ने संगठन को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि किसानों की आवाज को बुलंद करने के लिए समय-समय पर बैठकों का आयोजन किया जाता है और इसी कड़ी में आज सोनीपत में यह बैठक आयोजित की गई है।
बैठक के दौरान संगठन का विस्तार करते हुए किसान वीरेंद्र पहल को सोनीपत जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष ने लगातार बढ़ रही महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जब पहले दूसरी पार्टियों की सरकारें होती थीं, तब मौजूदा सत्ता पक्ष के नेता मामूली महंगाई पर भी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते थे, लेकिन आज पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं और सरकार के नेता पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं।
किसान रतनमान ने कहा कि बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर किसानों और खेती पर पड़ रहा है। डीजल और पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे किसान आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द महंगाई पर नियंत्रण नहीं किया तो किसानों की ओर से बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
एमएसपी के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसानों ने 13 महीने तक दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन किया, लेकिन आज तक सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कोई ठोस कानून नहीं बनाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि किसान और खेती आगे बढ़े। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं उन्होंने युवाओं में बढ़ते आक्रोश का जिक्र करते हुए कहा कि बेरोजगारी के कारण युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और नए विकल्प तलाश रहा है।
इसके अलावा उन्होंने मंडियों में धान और गेहूं घोटाले के आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्ष भी इस मुद्दे पर चुप है, जिससे साफ है कि सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं। हालांकि किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपने हकों की लड़ाई लगातार जारी रखेंगे।

