Ravindra Singh Bhati-Hanuman Beniwal: राजस्थान की राजनीति में रविंद्र सिंह भाटी और हनुमान बेनीवाल के साथ आने की चर्चा फिर तेज हो गई है। शिव विधायक भाटी की EWS यात्रा के बीच आरएलपी नेता और पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल ने कहा कि जनहित के मुद्दों पर लड़ाई मिलकर लड़नी चाहिए।

उन्होंने भाटी का नाम लेते हुए कहा कि हनुमान बेनीवाल जैसा लड़ाका कहीं नहीं है और सभी को साथ आकर लड़ना चाहिए। उनके इस बयान के बाद दोनों नेताओं के संभावित राजनीतिक साथ को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, फिलहाल किसी औपचारिक गठबंधन या राजनीतिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

EWS आंदोलन के सवाल पर आया बयान

दरअसल, एक इंटरव्यू में नारायण बेनीवाल से रविंद्र सिंह भाटी की EWS को लेकर चल रही यात्रा और आंदोलन पर सवाल पूछा गया था। जवाब में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी हर अच्छे मुद्दे और जनहित की बात करने वाले व्यक्ति के साथ खड़ी है। नारायण बेनीवाल ने कहा कि जब समान अधिकार और समानीकरण की बात हो रही हो, तो पीछे हटने का सवाल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में अलग-अलग दिशाओं में ऊर्जा बंट रही है।

‘सब भाई-भाई मिलकर क्यों नहीं लड़ते?’

नारायण बेनीवाल ने इसी संदर्भ में रविंद्र सिंह भाटी और हनुमान बेनीवाल को लेकर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, आज जिस तरह की लड़ाई है, हम सबको मिलकर लड़नी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि रविंद्र सिंह भाटी को पता होना चाहिए कि हनुमान बेनीवाल जैसा लड़ाका कहीं नहीं है। ऐसे में सभी भाई-भाई मिलकर क्यों नहीं लड़ते? उनके बयान को भाटी के लिए राजनीतिक साथ आने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले जून 2026 में भी हनुमान बेनीवाल ने भाटी और नरेश मीणा के लिए RLP के दरवाजे खुले होने की बात कही थी।

जातीय राजनीति पर भी उठाया सवाल

नारायण बेनीवाल ने कहा कि प्रदेश में आखिर कब तक जातियों के नाम पर वोट बटोरने का खेल चलता रहेगा। उनके मुताबिक, अलग-अलग दिशाओं में बंटी राजनीतिक ऊर्जा को एक मंच पर लाने की जरूरत है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से कुछ त्याग करने और वैचारिक दूरियां कम करने की बात भी कही। उनका कहना था कि अगर नेता थोड़ा त्याग करेंगे तो जनता भी उनके साथ मजबूती से जुड़ सकती है।

राजपूत समाज का भी किया जिक्र

नारायण बेनीवाल ने अपने राजनीतिक सफर और उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि अब वे जीवन के अलग पड़ाव में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही कई मौकों पर वैचारिक मतभेद रहे हों, लेकिन राजपूत समाज के लोग भी यह मानते हैं कि राजस्थान में हनुमान बेनीवाल जैसा सड़क पर संघर्ष करने वाला दूसरा कोई नेता नहीं है। उनके मुताबिक, राजस्थान का वास्तविक भला करने के लिए राजनीतिक त्याग और वैचारिक दूरियां कम करना जरूरी है।

भाटी की EWS यात्रा से जुड़ा है पूरा घटनाक्रम

रविंद्र सिंह भाटी इन दिनों EWS आरक्षण के नियमों में सरलीकरण और बदलाव की मांग को लेकर जन-संवाद यात्रा निकाल रहे हैं। यह यात्रा 26 सितंबर को बाड़मेर से शुरू हुई थी। भाटी EWS प्रमाण-पत्र की वैधता और राज्य के प्रमाण-पत्र को केंद्र में मान्यता देने जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। ऐसे में नारायण बेनीवाल का बयान उसी मुद्दे से जुड़े सवाल के जवाब में आया है। यही वजह है कि बयान के बाद भाटी और बेनीवाल के संभावित साथ को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ गई है।

अभी गठबंधन नहीं, सिर्फ बयान से बढ़ी चर्चा

नारायण बेनीवाल के बयान से दोनों नेताओं के साथ आने की संभावना पर चर्चा जरूर शुरू हुई है, लेकिन अभी तक किसी औपचारिक गठबंधन या साझा राजनीतिक मंच की घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक संकेत और सार्वजनिक बयान के तौर पर ही देखा जा रहा है। राजस्थान की राजनीति में भाटी और बेनीवाल दोनों अलग-अलग मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नारायण बेनीवाल के इस बयान के बाद रविंद्र सिंह भाटी और हनुमान बेनीवाल की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है।