दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को संसद में खुली बहस की चुनौती दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के शासनकाल की कई घटनाओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने बहस करने की चुनौती दी है। दरअसल, राहुल गांधी ने 2 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी थी। उन्होंने विदेशी समर्थन और देश की आर्थिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री से सार्वजनिक चर्चा करने की बात कही थी। इसके बाद 3 नवंबर को राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी चुनौती दोहराई और देश के युवाओं से पूछा कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच खुली बहस देखना चाहते हैं।
रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहुल गांधी के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, “राहुल गांधी जी, ओपन चैलेंज। संसद में आइए। बहस करते हैं!” उन्होंने आगे 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए लिखा कि उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया और प्रेस की आवाज पर पाबंदियां लगाई गई थीं। उन्होंने इसे लोकतंत्र का गला घोंटने वाला दौर बताया।रेखा गुप्ता ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि उस समय राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे और दिल्ली में हजारों निर्दोष सिखों की हत्या हुई थी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर इस विरासत से बचने का आरोप भी लगाया।
2014, 2019 और 2024 के चुनावों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लोकसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए लिखा, “2014, 2019 और 2024 लगातार तीन टर्म। चौथा टर्म तो आपका सबसे बड़ा बुरा सपना है। भागना मत! जगह भारत की संसद, नई दिल्ली। वीजा की जरूरत नहीं।” इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती दोहराई और चर्चा के लिए संसद को स्थान बताया।
इमरजेंसी और 1984 के सिख विरोधी दंगों का उठाया मुद्दा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी एक्स पोस्ट में 1975 में लागू की गई इमरजेंसी और 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी के दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था और प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई थी। उन्होंने इस दौर को लोकतंत्र के लिए एक कठिन समय बताते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए।वहीं, 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि उस दौरान हजारों निर्दोष सिखों की हत्या हुई थी। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक विरासत पर सवाल खड़े करते हुए राहुल गांधी को इस मुद्दे पर जवाब देने की चुनौती दी।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे संसद में आएं और खुली बहस करें। उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की लगातार चुनावी हार पर भी तंज कसा। अपनी पोस्ट के अंत में रेखा गुप्ता ने बहस के लिए नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद को स्थान बताते हुए लिखा कि इसके लिए किसी वीजा की जरूरत नहीं है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी थी खुली बहस की चुनौती
दरअसल, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक मंच पर खुली बहस की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री विपक्ष को देशद्रोही बताते हैं, ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच खुलकर चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी ने बहस के लिए प्रधानमंत्री को अपनी पसंद का कोई भी स्थान और मंच चुनने की छूट दी थी। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि चर्चा के दौरान मीडिया और देश के युवा भी मौजूद रहें। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को बहस का निर्णायक बनाने का सुझाव भी दिया।
अमेरिका के साथ समझौते और एपस्टीन मामले पर चर्चा का प्रस्ताव
राहुल गांधी ने अपनी चुनौती में कई मुद्दों को शामिल किया। उन्होंने देश की वित्तीय व्यवस्था, वित्तीय ढांचे और अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यह समझौता कैसे और इतनी जल्दी हुआ तथा इसमें केंद्रीय कैबिनेट की भूमिका क्या रही। इसके अलावा उन्होंने अडानी मामले और एपस्टीन से जुड़े मुद्दों पर भी खुली चर्चा करने की बात कही। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष पर विदेशी ताकतों से संबंध होने के आरोप लगाए जाते हैं, इसलिए इन आरोपों पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा था, “24 घंटे हो गए, मोदी जी। मैंने आपको चैलेंज दिया है। आप कहते हैं कि विपक्ष देशद्रोही है। किसी भी स्टेज पर आप जगह चुनिए, डिबेट कीजिए मेरे साथ। देशद्रोही कौन है? विदेशी ताकतों का कनेक्शन किसका है? और किस प्रकार का कनेक्शन है?” उन्होंने आगे कहा कि दोनों नेता आमने-सामने बैठें, मीडिया और देश के युवा मौजूद रहें तथा प्रधानमंत्री अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को निर्णायक बना सकते हैं। इसके लिए उन्होंने मोहन भागवत का नाम भी सुझाया।
मानहानि के मामलों का भी किया उल्लेख
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उनके खिलाफ करीब 45 मानहानि के मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी संबंधों से जुड़े उनके आरोपों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए। साथ ही प्रधानमंत्री को चुनौती दी कि यदि उन्हें उनके आरोपों पर आपत्ति है तो वे इस मामले में भी कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। अपनी पोस्ट के अंत में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से बहस के लिए आगे आने की अपील करते हुए दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं। इस तरह राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई खुली बहस की चुनौती के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उन्हें संसद में बहस के लिए आमंत्रित कर दिया। दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर हुई इस बयानबाजी ने राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दे दिया है।
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