Business Desk :- रिलायंस का नाम भारतीय शेयर बाजार में दशकों से भरोसे की पहचान रहा है। धीरूभाई अंबानी ने आम लोगों को शेयर बाजार से जोड़ा था। अब मुकेश अंबानी और उनके बेटे आकाश अंबानी के सामने इस विरासत को नई पीढ़ी के निवेशकों के बीच बनाए रखने की चुनौती है।

जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 21 अक्टूबर को खुलने वाला है। करीब 3.2 अरब डॉलर जुटाने की योजना वाले इस इश्यू से पता चलेगा कि निवेशक अंबानी परिवार के नाम पर कितना भरोसा करते हैं और कंपनी की कमाई, ग्रोथ व वैल्यूएशन को कितना महत्व देते हैं।

धीरूभाई की विरासत पर कितना भरोसा?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 13 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत शेयर बाजार निवेशक हैं। इनमें करीब 40 फीसदी की उम्र 30 साल से कम है।

आज निवेशकों के पास शेयर, म्यूचुअल फंड और दूसरे निवेश विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में केवल बड़े कारोबारी घराने का नाम निवेश के फैसले के लिए काफी नहीं है।

1977 में 2.8 करोड़ का IPO, सात गुना सब्सक्रिप्शन

रिलायंस ने नवंबर 1977 में शेयर बाजार में कदम रखा था। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, IPO से 2.8 करोड़ रुपये जुटाए गए और करीब 58,000 निवेशकों ने हिस्सा लिया। इश्यू को सात गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

1980 के दशक के मध्य में मुंबई के कूपरेज फुटबॉल मैदान में रिलायंस की वार्षिक आम बैठक में बड़ी संख्या में शेयरधारक पहुंचे थे।

मुंबई में आयोजित एक रोडशो की प्रस्तुति के मुताबिक, लिस्टिंग के बाद रिलायंस के शेयर ने सालाना औसतन करीब 29 फीसदी रिटर्न दिया है। हालांकि, इस साल कंपनी का शेयर 23 फीसदी टूट चुका है और 2011 के बाद अपने सबसे खराब सालाना प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है।

Jio Platforms IPO का वैल्यूएशन कितना?

जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग की कमान 34 वर्षीय आकाश अंबानी संभाल रहे हैं। मुकेश अंबानी के बड़े बेटे और कंपनी के प्रबंध निदेशक के रूप में यह उनका पहला बड़ा स्वतंत्र रिलायंस सौदा है।

पहले जियो का संभावित मूल्यांकन करीब 11 लाख करोड़ रुपये रहने की चर्चा थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रोडशो में फंड मैनेजरों ने सवाल उठाया कि जियो को भारती एयरटेल के मुकाबले प्रीमियम वैल्यूएशन क्यों मिलना चाहिए।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों ने यह भी पूछा कि दूरसंचार कारोबार के अलावा जियो अपनी डिजिटल सेवाओं से कमाई कैसे बढ़ाएगी।

कंपनी ने IPO के लिए प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। अपर प्राइस बैंड पर जियो का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर है, जबकि भारती एयरटेल का बाजार मूल्य करीब 125 अरब डॉलर बताया गया है।

20 अरब डॉलर से ज्यादा की बोलियां, विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, जियो के IPO के लिए 20 अरब डॉलर से ज्यादा की बोलियां मिली हैं। फिडेलिटी मैनेजमेंट एंड रिसर्च, एलियांज SE और कैपिटल ग्रुप जैसे विदेशी निवेशकों ने भी दिलचस्पी दिखाई है।

हालांकि, मजबूत मांग के बावजूद कंपनी की कमाई और भविष्य में मुनाफा बढ़ाने की क्षमता निवेशकों के लिए अहम होगी।

IPO के बाद शेयर बेचेंगे निवेशक या रखेंगे?

बाजार नियामक के 2024 के एक अध्ययन के मुताबिक, खुदरा निवेशकों ने IPO में मिले 40 फीसदी शेयर लिस्टिंग के एक सप्ताह के भीतर बेच दिए। जिन IPO में रिटर्न 20 फीसदी से ज्यादा रहा, उनमें निवेशकों ने करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी बेच दी।

भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर के शेयर बाजार में निवेशकों के पास कई विकल्प हैं। ऐसे में जियो को लगातार बेहतर प्रदर्शन करके निवेशकों का भरोसा जीतना होगा।

करीब एक दशक पहले सस्ती 4G डेटा सेवाओं के साथ बाजार में उतरकर जियो ने दूरसंचार क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा बदल दी थी। अब कंपनी के सामने अपनी अगली ग्रोथ स्टोरी को सफल बनाने की चुनौती है।

एसपी तुलसियान डॉट कॉम की निवेश सलाहकार गीतांजलि केड़िया के मुताबिक, निवेशक अब कंपनियों का मूल्यांकन अधिक सावधानी से करते हैं। कंपनियों को भरोसा बनाए रखने के लिए लगातार बेहतर रिटर्न देना होगा।

क्या अंबानी परिवार की विरासत जियो को दिलाएगी सफलता?

जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO सिर्फ एक बड़े कारोबारी समूह की लिस्टिंग नहीं है। यह कंपनी की कमाई, डिजिटल सेवाओं की ग्रोथ और शेयर के मूल्यांकन की भी परीक्षा होगी।

निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या अंबानी परिवार की विरासत भरोसा जीतने के लिए पर्याप्त होगी या जियो को अपने वित्तीय प्रदर्शन से निवेशकों को प्रभावित करना पड़ेगा। लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन भी इस भरोसे की अहम कसौटी बनेगा।