राकेश कथूरिया, कैथल। न्यायिक परिसर में शनिवार को आयोजित विशेष लोक अदालत ने कई परिवारों को बड़ी राहत दी है। इस अदालत का मुख्य उद्देश्य चेक बाउंस (Negotiable Instruments Act, 1881, धारा-138) से जुड़े मामलों को आपसी समझौते के जरिए सुलझाना था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में हुई इस पहल में सैकड़ों लोगों ने अपने लंबित विवादों का निपटारा किया।

अदालत में निपटे 198 मामले
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने बताया कि इस विशेष अदालत के लिए 3,258 मामले सुनवाई के वास्ते रखे गए थे। इनमें से 198 केस ऐसे थे जिन्हें दोनों पक्षों की सहमति से सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया। इन मामलों में शामिल कुल विवादित राशि 5 करोड़ 74 लाख 56 हजार 44 रुपये रही, जिसका समाधान खुशी-खुशी निकाल लिया गया।
लोक अदालत क्यों है फायदेमंद?
अदालत के माध्यम से केस सुलझाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे दोनों पक्षों के बीच आपसी संबंध और विश्वास बना रहता है। सामान्य अदालतों में केस लड़ने की प्रक्रिया काफी लंबी और खर्चीली हो सकती है, जबकि लोक अदालत में फैसला अंतिम होता है। इस फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती, जिससे कानूनी प्रक्रिया हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। इसके साथ ही, सरकारी नियमों के अनुसार, लोक अदालत में केस सेटल होने पर कोर्ट फीस भी वापस मिल जाती है।
विभिन्न बेंचों का हुआ गठन
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों की अलग-अलग बेंच बनाई गई थी। इनमें नंदिता कौशिक, संदीप कौर, जसमीन कौर, अक्षय चौधरी और राजविंदर सिंह शामिल थे। इन बेंचों ने दिन भर मामलों की सुनवाई की और पक्षों के बीच सामंजस्य बिठाया। प्राधिकरण ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी कानूनी समस्याओं को सुलझाने के लिए भविष्य में भी लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
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