रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी है। रिम्स की 66वीं गवर्निंग बॉडी (जीबी) की बैठक में 10 नए विभाग शुरू करने, सुपर स्पेशियलिटी की सीटें बढ़ाने और पीजी सीटों का विस्तार करने सहित कई अहम फैसले लिए गए। इसके साथ ही नर्सिंग सेवाओं को मजबूत करने, आयुष्मान मित्रों की बहाली, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और पूरे परिसर के कायाकल्प पर 466 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है।

10 नए विभाग खुलेंगे, सुपर स्पेशियलिटी की सीटें बढ़ेंगी

रिम्स में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, रूमेटोलॉजी, न्यूरो एनेस्थीसिया, कार्डियक एनेस्थीसिया, न्यूक्लियर मेडिसिन और इमरजेंसी मेडिसिन समेत 10 नए विभाग शुरू करने की योजना है। इन विभागों के शुरू होने से गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधाएं बढ़ेंगी। मरीजों को विशेषज्ञ इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहने की जरूरत भी कम हो सकती है।

बैठक में सुपर स्पेशियलिटी की मौजूदा 11 सीटों को बढ़ाकर 150 करने की प्रक्रिया तेज करने पर सहमति बनी। वहीं, पीजी की सीटें 176 से बढ़ाकर 250 करने की योजना है। डॉक्टरों की बहाली प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए रिम्स नियमावली में संशोधन और नई चयन समिति के गठन का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया।इसके अलावा चिकित्सकों के 319 पदों का पुनर्गठन होगा और 16 नए पद सृजित किए जाएंगे।

मरीजों का इलाज और मेडिकल शिक्षा में योगदान पर मिलेगी प्राथमिकता

रिम्स में डॉक्टरों की प्रोन्नति के लिए नई सेवा शर्तों को मंजूरी दी गई है। अब रिसर्च पेपर के साथ पीजी विद्यार्थियों को गाइड करने और अधिक मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सकों के योगदान को भी महत्व दिया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत मेडिकल शिक्षा और मरीजों के उपचार में योगदान के आधार पर अतिरिक्त अंक और प्राथमिकता देने का प्रावधान होगा। अब तक प्रोन्नति में रिसर्च पेपर को प्रमुख आधार माना जाता था। बदलाव से चिकित्सकों के शैक्षणिक और क्लिनिकल कार्यों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।

नर्सों के 106 और हॉस्पिटल मैनेजर के 12 पद बनेंगे

रिम्स में नर्सिंग सेवाओं को मजबूत करने के लिए 106 नए पद सृजित किए जाएंगे। इसके अलावा 144 नर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है। अस्पताल के बेहतर संचालन और प्रबंधन के लिए हॉस्पिटल मैनेजर के 12 पद बनाए जाएंगे।

आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए 100 आयुष्मान मित्रों की बहाली की जाएगी। इनकी तैनाती से योजना के लाभार्थियों को अस्पताल में इलाज से संबंधित प्रक्रियाओं में मदद मिलने की उम्मीद है।

नॉन टीचिंग पद घटेंगे, तकनीकी पदों पर होगा जोर

गवर्निंग बॉडी की बैठक में नॉन टीचिंग पदों की संख्या 1,962 से घटाकर 1,862 करने का निर्णय लिया गया। पदों के पुनर्गठन के तहत आईटी मैनेजर, हॉस्पिटल मैनेजर और लैब टेक्नीशियन जैसे जरूरी तकनीकी एवं प्रबंधन पदों के सृजन पर जोर दिया जाएगा।

इसके साथ ही रिम्स रेगुलेशन, 2014 की जगह रेगुलेशन एक्ट, 2026 लाने का निर्णय लिया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और मानव संसाधन प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

466 करोड़ से होगा परिसर का कायाकल्प

रिम्स परिसर के जीर्णोद्धार और विकास पर 466 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके तहत विभिन्न विभागों, छात्रावासों, डॉक्टरों के आवासीय परिसर और अन्य भवनों का विकास किया जाएगा।

पीजी विद्यार्थियों और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए डीआईजी ग्राउंड में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर हॉस्टल बनाने की योजना है। यहां रहने के लिए निर्धारित शुल्क देना होगा। इसी मैदान में आधुनिक खेल परिसर विकसित करने की भी योजना बनाई गई है।

ईको और अल्ट्रासाउंड की नई मशीनें खरीदी जाएंगी

रिम्स में जांच सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नई ईको और अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के अनुसार, इन जांचों के लिए मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार जांच में देरी होने से इलाज की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

नई मशीनों की खरीद से जांच का दबाव कम करने और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रिम्स की सुरक्षा अब सैप के हवाले करने की तैयारी

रिम्स परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से स्पेशल ऑक्सिलियरी पुलिस (सैप) के जवानों को सौंपने की योजना है। वर्तमान में तैनात होमगार्ड जवानों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाएगी और सुरक्षा की जिम्मेदारी सैप को दी जाएगी।

अस्पताल के संचालन को बेहतर बनाने के लिए 10 नई समितियों के गठन का भी निर्णय लिया गया है। इनमें स्थायी एवं लेखा समिति, स्थायी प्रोन्नति समिति, स्थायी शैक्षणिक समिति, स्थायी संपदा समिति, स्थायी तकनीकी समिति, स्थायी भंडार एवं निविदा समिति, स्थायी अस्पताल समिति और स्थायी सुरक्षा समिति समेत अन्य समितियां शामिल हैं। पहले रिम्स में पांच समितियां थीं।

नई समितियों के गठन से प्रशासनिक, शैक्षणिक, तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कार्यों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से करने का लक्ष्य है।

प्रभारी निदेशक के कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा

बैठक में रिम्स के प्रभारी निदेशक प्रो. डॉ. डीके सिन्हा को कार्यकाल विस्तार देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इस संबंध में अंतिम निर्णय के लिए प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा। डॉ. सिन्हा इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

स्थायी निदेशक की नियुक्ति के लिए जल्द विज्ञापन जारी करने की बात कही गई है। यदि समय पर कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिलती है, तो रिम्स में नए प्रभारी निदेशक की नियुक्ति करनी पड़ सकती है। स्थायी निदेशक की नियुक्ति होने तक डॉ. सिन्हा को पद पर बनाए रखने के प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगा। निर्णय में देरी होने की स्थिति में वरीयता के आधार पर अगले दो महीने के लिए किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

जानकारी के अनुसार, स्थायी निदेशक की नियुक्ति से संबंधित फाइल पहले से स्वास्थ्य मंत्री के पास है। नियमों के तहत स्थायी निदेशक की नियुक्ति छह महीने के भीतर किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

अगले जीबी सत्र तक फैसलों को लागू करने का निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिए गए फैसलों को अगली बैठक तक हर हाल में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने निदेशक को सभी निर्णय समय पर पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया, ताकि इनका लाभ मरीजों, विद्यार्थियों और डॉक्टरों को मिल सके।

रिम्स में प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य इलाज की गुणवत्ता सुधारना, विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना और अस्पताल के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाना है।