रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। संस्थान में तैनात करीब 400 होमगार्ड जवानों को हटाकर उनकी जगह पूर्व सैनिकों को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी है। रिम्स की 66वीं शासी परिषद की बैठक में होमगार्ड के स्थान पर सैप जवानों की तैनाती का प्रस्ताव स्वीकृत किया जा चुका है। नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है।

रिम्स प्रबंधन के अनुसार, अस्पताल परिसर में लगातार सामने आ रहे हंगामे, मरीजों के परिजनों और चिकित्सकों के बीच विवाद व मारपीट तथा संवेदनशील स्थानों पर भीड़ को नियंत्रित करने की चुनौती को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत महसूस की गई है।

अस्पताल में क्यों बढ़ी सुरक्षा की जरूरत?

रिम्स की इमरजेंसी, ट्रॉमा सेंटर, सर्जरी वार्ड और अन्य संवेदनशील विभागों में 24 घंटे मरीजों और उनके स्वजनों की आवाजाही रहती है। कई बार इलाज में देरी या मरीज की मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है।

ऐसे हालात में सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी केवल भीड़ को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रहती। उन्हें तत्काल मौके पर पहुंचकर चिकित्सकों, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ समन्वय भी करना पड़ता है।

वजह नंबर-1: मरीज की मौत के बाद डॉक्टरों पर हुआ था हमला

6 सितंबर 2026 को रिम्स के सर्जरी विभाग के सी-टू वार्ड में एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इस दौरान दो जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई थी।

आरोप है कि हमलावरों ने सलाइन चढ़ाने वाली रॉड से चिकित्सकों पर हमला किया। घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी में करीब एक घंटे तक कार्य बहिष्कार किया था।

प्रबंधन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आश्वासन दिए जाने के बाद डॉक्टरों ने काम शुरू किया। इस घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने परिसर में त्वरित कार्रवाई करने वाली सुरक्षा टीम गठित करने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी।

वजह नंबर-2: मारपीट की घटनाओं पर उठे सवाल

इससे पहले 25 अगस्त 2025 को रिम्स की इमरजेंसी में पीजी चिकित्सकों और पैरामेडिकल छात्रों के बीच मारपीट हुई थी। घटना के बाद पैरामेडिकल छात्रों ने काम बाधित कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

वहीं, अगस्त 2024 में भी जूनियर डॉक्टरों और सुरक्षा कर्मियों के बीच विवाद के बाद मारपीट की घटना सामने आई थी। लगातार सामने आई इन घटनाओं ने अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा कर्मियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए।

होमगार्ड की जगह सैप जवान क्यों?

रिम्स प्रबंधन का मानना है कि अस्पताल के संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें किसी भी अप्रिय स्थिति पर तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके। सैप के जवानों की तैनाती से संवेदनशील स्थानों पर त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है।

रिम्स अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ के अनुसार, नई योजना का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाना है।

इमरजेंसी से वार्ड तक बढ़ेगी सुरक्षा

नई व्यवस्था प्रभावी होने के बाद इमरजेंसी में हंगामा करने वालों को नियंत्रित करने, चिकित्सकों और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील वार्डों में अनधिकृत प्रवेश रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, मौजूदा होमगार्ड जवानों को हटाने की प्रक्रिया और सैप जवानों की तैनाती चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। रिम्स प्रबंधन का फोकस ऐसी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने पर है, जो अस्पताल में मरीजों के इलाज के साथ-साथ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी सुरक्षित माहौल उपलब्ध करा सके।