कुंदन कुमार, पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच के संबंधों को लेकर एक तीखा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर जदयू की वर्तमान स्थिति पर तंज कसते हुए कहा है कि अब पार्टी में पहले जैसी ताकत और एकजुटता नहीं बची है। राजद प्रवक्ता के इस बयान से राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
जदयू अब बिखराव की स्थिति में: शक्ति सिंह यादव
राजद प्रवक्ता ने अपने बयान में दावा किया कि जदयू अब पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो चुका है और इस पार्टी की वैचारिक तथा सांगठनिक ताकत कमजोर पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि इसी कमजोरी का फायदा उठाकर बीजेपी अपनी मनमानी कर रही है और वह अपने इशारों पर जदयू को नचा रही है। शक्ति सिंह यादव के अनुसार, यह बात पहले से ही तय मानी जा रही थी कि बीजेपी एनडीए गठबंधन के भीतर अपने सहयोगियों को दबाकर रखेगी और अपने हिसाब से फैसले लेगी।
निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थन को लेकर साधा निशाना
शक्ति सिंह यादव ने इस बात का भी जिक्र किया कि बीजेपी ने हाल ही में जिन निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने पाले में किया है, उनका जदयू की तरफ से कड़ा विरोध किया जा रहा था। इसके बावजूद बीजेपी ने जदयू की आपत्तियों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि उनके इस कदम से सहयोगी दल को कैसा महसूस होगा। बीजेपी यह अच्छी तरह समझती है कि मौजूदा हालात में जदयू के पास जाने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है और वह कहीं और नहीं जा सकता।
उमेश कुशवाहा के दर्द और नेतृत्व पर सवाल
राजद प्रवक्ता ने तंज कसते हुए आगे कहा कि जदयू में अब वे पुराने दिग्गज नेता और तेवर ही नहीं बचे हैं, जो अपने बलबूते पार्टी के हितों की रक्षा कर सकें। पार्टी में वर्तमान में जो नेता हैं, वे केवल बीजेपी के पिछलग्गू बनकर रह गए हैं। यही वजह है कि बीजेपी को किसी भी फैसले से पहले जदयू से डरने या विचार करने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती। हाल ही में जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का दर्द भी इसी राजनीतिक बेबसी के चलते छलका है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
राजद नेता ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आने वाले समय में बीजेपी अपनी मनमानी और बढ़ाएगी। उन्होंने अंत में कहा कि आगे-आगे देखिए राजनीति में क्या-क्या नए मोड़ आते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

