दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को 150 नई इलेक्ट्रिक बसें शुरू कीं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav) और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने आनंद विहार अंतरराज्यीय बस अड्डे से इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही राजधानी में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए 13 नए मॉनिटरिंग स्टेशन भी शुरू किए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए इलेक्ट्रिक बसों पर जोर
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना है। नई बसों के संचालन से यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयासों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में अब 60 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन
इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए 13 नए मॉनिटरिंग स्टेशन भी चालू किए गए हैं। इनके शुरू होने के बाद राजधानी में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इन स्टेशनों के जरिए दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। मॉनिटरिंग नेटवर्क के विस्तार से अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण के स्तर से जुड़े आंकड़े जुटाने और वायु गुणवत्ता की स्थिति का आकलन करने में सुविधा होगी।
5 जगहों पर EV चार्जिंग स्टेशनों का उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान आनंद विहार ISBT, नंद नगरी, रोहिणी सेक्टर-37, नांगलोई और केशोपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए चार्जिंग स्टेशनों का भी उद्घाटन किया गया। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिशन मोड में काम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से मिशन मोड में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ चार्जिंग सुविधाओं और वायु गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। सरकार का जोर परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण करने पर है।
ICCC बना प्रदूषण नियंत्रण का वॉर रूम
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शास्त्री पार्क स्थित दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह केंद्र प्रदूषण के खिलाफ वॉर रूम की तरह काम कर रहा है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक, आधुनिक कैमरों और बॉडी कैमरों की मदद से प्रदूषण से जुड़े विभिन्न कारकों पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा रही है।
700 से अधिक निर्माण स्थलों पर निगरानी
मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि ICCC के जरिए 700 से अधिक निर्माण स्थलों, मैकेनिकल रोड स्वीपर्स, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों और वायु रक्षक टीमों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि सड़क और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, ट्रैफिक जाम, खुले में कूड़ा और बायोमास जलाने तथा औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। इन गतिविधियों पर निगरानी के साथ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण किया जा सके।
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़कर 5,238 पहुंचा
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि 150 नई इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने के बाद दिल्ली में ई-बसों की संख्या बढ़कर 5,238 हो गई है। राजधानी के कुल बस बेड़े में करीब 6,988 बसें शामिल हैं, जिनमें 1,750 सीएनजी बसें हैं। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2028-29 तक दिल्ली में बसों की कुल संख्या बढ़ाकर लगभग 14,000 करना है। उन्होंने बताया कि नई इलेक्ट्रिक बसें वातानुकूलित और लो-फ्लोर हैं, ताकि यात्रियों को आरामदायक सफर की सुविधा मिल सके। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और रियल-टाइम ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा, दिव्यांग यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी व्यवस्था की गई है।
आनंद विहार ISBT पर हाई-पावर चार्जिंग की सुविधा
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को बढ़ावा देने के लिए पांच स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशनों की शुरुआत की गई है। इनमें आनंद विहार अंतरराज्यीय बस अड्डे पर 240 किलोवाट क्षमता के आठ और 60 किलोवाट क्षमता के दो चार्जर लगाए गए हैं। यहां बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1,600 केवीए क्षमता का सब-स्टेशन भी बनाया गया है। वहीं, नंद नगरी, रोहिणी सेक्टर-37, नांगलोई और केशोपुर में 240 किलोवाट क्षमता के चार-चार चार्जर लगाए गए हैं। इन चार्जिंग स्टेशनों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक बसों के साथ-साथ निजी इलेक्ट्रिक वाहन भी कर सकेंगे।
आनंद विहार ISBT पर रोजाना पहुंचते हैं 1.25 लाख यात्री
अधिकारियों के मुताबिक, आनंद विहार ISBT से प्रतिदिन करीब 2,300 बसों का संचालन होता है और लगभग 1.25 लाख यात्री यहां पहुंचते हैं। ऐसे में यहां उच्च क्षमता वाले चार्जिंग स्टेशन शुरू होने से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार होगा। इसके अलावा, कश्मीरी गेट स्थित महाराणा प्रताप ISBT और सराय काले खां स्थित वीर हकीकत राय ISBT पर भी उच्च क्षमता वाले ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के जरिए दिल्ली में इलेक्ट्रिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
PM 2.5 और PM-10 की होगी लगातार निगरानी
दिल्ली में शुरू किए गए 13 नए कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर पीएम 2.5 और पीएम-10 जैसे प्रमुख वायु प्रदूषकों की लगातार निगरानी की जाएगी। इन स्टेशनों से राजधानी के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े उपलब्ध होंगे। इससे प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने और विभिन्न क्षेत्रों की हवा की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
ICCC के जरिए 24 घंटे निगरानी
दिल्ली सरकार के अनुसार, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। इसके लिए एआई आधारित कैमरों और मैकेनिकल रोड स्वीपर्स की जीपीएस ट्रैकिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस व्यवस्था के जरिए सफाई मशीनों की गतिविधियों पर नजर रखने और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्यों की समीक्षा करने में मदद मिलती है। सरकार का जोर तकनीक के इस्तेमाल से निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।
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