Bihar News: नेपाल में मचे तबाही के बाद बिहार में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है, जिसे देखते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने आज गुरुवार को गंडक, कोसी समेत अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर का जायजा लेने के लिए हवाई सर्वेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खासकर नेपाल से सटे बिहार के संवेदनशील जिलों का भी निरीक्षण किया।

बाढ़ के संभावित खतरों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद सीएम सम्राट ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान जब, उनसे पूछा गया कि क्या बिहार में बाढ़ का खतरा टल गया है। इसपर सीएम ने कहा कि, अभी तक जो स्थिति है, वह सामान्य है। भगवान की कृपा रही तो स्थिति सामान्य रहेगी। सीएम के इस बयान पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने तंज कसा है।

‘मुख्यमंत्री पर तरस आता है….’

रोहिणी आचार्य ने सीएम सम्राट पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, बिहार के मुख्यमंत्री को शायद पता नहीं कि शासन व्यवस्था संसाधनों और जमीनी योजना के समुचित प्रबंधन से चलती है न कि भगवान के आशीर्वाद के भरोसे। उन्होंने आगे कहा कि, बिहार के मुख्यमंत्री का ये बयान सुन कर मुख्यमंत्री पर तरस आता है कि मुख्यमंत्री भगवान के भरोसे, भगवान के आशीर्वाद की आस में बिहार को संभावित बाढ़ की विभीषिका से बचाने की बात करते दिख रहे हैं।

जवाबदेही से बचने का प्रयास- रोहिणी आचार्य

उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री को शायद इस बात का ज्ञान व् भान नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सुचारु योजना (प्लानिंग). मजबूत तटबंध, आधुनिक बुनियादी ढांचे और त्वरित प्रशासनिक तैयारियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री के द्वारा बाढ़ से राज्य की सुरक्षा को केवल ‘भगवान के आशीर्वाद के भरोसे’ छोड़ देने की बात करना मुख्यमंत्री की गंभीर नीतिगत नाकामी और जवाबदेही से बचने के उनके प्रयास को दर्शाता है।

भगवान और आस्था को बताया व्यक्तिगत विषय

रोहिणी आचार्य ने आगे कहा कि, भगवान पर आस्था जरूर होनी चाहिए, मगर आस्था व्यक्तिगत विषय है और शासन व्यवस्था संसाधनों और जमीनी योजना के समुचित प्रबंधन से चलती है न कि भगवान के भरोसे। उन्होंने कहा कि, जब किसी राज्य का मुख्यमंत्री बाढ़ नियंत्रण के ठोस ब्लूप्रिंट की बजाय ‘ईश्वरीय कृपा’ की बात करता दिखता है, तो वो सीधे तौर पर राज्य के बुनियादी ढांचे के अभाव को छिपाने की कोशिश करता और अपनी जवाबदेही से पलायन करता दिखता है।

रोहिणी ने कहा कि, भगवान के आशीर्वाद के भरोसे आपदा प्रबंधन को छोड़ना जनहित की अवहेलना और राज्य के मुख्यमंत्री की नक्कारी – लाचारी का प्रतीक है। मुख्यमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति से जनता वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राउंड रिलीफ की उम्मीद करती है, न कि केवल ‘भगवान के आशीर्वाद’ की कामना की।

हवाई सर्वेक्षण के बाद सीएम ने क्या कहा?

बिहार में बाढ़ की स्थिति पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, बाढ़ का पूरा जायजा हम लोगों ने लिया और भगवान की कृपा से लगभग सभी चीजें स्थिर हो रही हैं। हम लोगों ने वाल्मीकि नगर तक जाकर देखा। अब धीरे-धीरे चीजें ठीक हो रही हैं। पानी से अब कोई दिक्कत नहीं लग रही है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का लगातार संपर्क रहा। वो बिहार की चिंता लगातार कर रहे थे क्योंकि हम लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा था कि कितना पानी है। हम लोग स्थिर हैं।

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