Rohtak Mayor Tushar Dahiya : रोहतक। हरियाणा के रोहतक से जुड़े तुषार दहिया और उनकी मां परवीन रानी ब्रिटेन में मेयर बनने के बाद पहली बार भारत पहुंचे। उनके घर लौटने पर परिवार और परिचितों ने ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। ब्रिटेन की स्थानीय राजनीति में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे मां-बेटे अब जनसेवा के साथ हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी काम कर रहे हैं।
23 साल की उम्र में तुषार बने मेयर
तुषार दहिया ब्रिटेन में एल्स्ट्री और बोरहमवुड टाउन काउंसिल के मेयर हैं। उनकी मां परवीन रानी हर्ट्समेयर बोरो काउंसिल की मेयर चुनी गई हैं। तुषार के मुताबिक, राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा उन्हें अपनी मां से मिली।
तुषार ने कम उम्र में ही सामुदायिक सेवा शुरू कर दी थी। करीब 16 साल की उम्र से लोगों के बीच काम करने के बाद वे 20 वर्ष की उम्र में काउंसलर बने। वर्ष 2025 में उन्हें डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी मिली और इसके बाद मेयर पद तक पहुंचे।
हिंदी और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल
तुषार और परवीन रानी का कहना है कि विदेश में रहने वाली भारतीय मूल की नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ना जरूरी है। ब्रिटेन में जन्मे कई बच्चे हिंदी नहीं जानते, जिसके कारण उन्हें अपने दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों से अपनी मातृभाषा में बातचीत करने में परेशानी होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए मां-बेटे हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के प्रयास कर रहे हैं। उनके प्रयासों से संबंधित काउंसिल में पहली बार दिवाली और हिंदी दिवस मनाया गया।
जनसमस्याओं का समाधान प्राथमिकता
तुषार दहिया का मानना है कि राजनीति में आने से पहले युवाओं को सामुदायिक सेवा से जुड़कर लोगों की जरूरतों और समस्याओं को समझना चाहिए। उनका जोर स्थानीय लोगों की समस्याओं के समाधान और समाज के लिए उपयोगी काम करने पर है।
रोहतक पहुंचने पर हुए स्वागत के बीच मां-बेटे की यह यात्रा उनके भारतीय मूल और संस्कृति से जुड़े रहने के संदेश के रूप में भी देखी जा रही है। ब्रिटेन में सार्वजनिक जिम्मेदारियां निभाने के साथ वे हिंदी और भारतीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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