रविंद्र भारद्वाज, रायबरेली. सपा नेता आरपी यादव को आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद जिले की सियासत पूरी तरह गरमा गई है. दो दिन पहले आए अदालत के इस फैसले के बाद जहां पार्टी के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता सहानुभूति जताने के लिए दीवानी कोर्ट, जिला अस्पताल और जेल के चक्कर काटते रहे, वहीं जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव की अनुपस्थिति ने सबको हैरान कर दिया.
जेल के बाहर जुटे कार्यकर्ताओं का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने जिलाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. कार्यकर्ताओं का सीधा सवाल था कि जब पार्टी का एक कद्दावर नेता इतने बड़े संकट में है, तो संगठन का मुखिया साथ क्यों नहीं खड़ा है? विरोध की आग बढ़ती देख आज जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी सफाई पेश की. हालांकि, लोगों के बीच अब यह चर्चा आम है कि यह सफाई पार्टी के आंतरिक दबाव में दी गई है या सोशल मीडिया पर हो रही किरकिरी से बचने के लिए.
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सिर्फ जिलाध्यक्ष ही नहीं, बल्कि पार्टी में बड़े पदों पर बैठे अन्य नेताओं की दूरी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि क्या पार्टी केवल रैलियों और मंचों तक सीमित है? मुश्किल घड़ी में अपनों से किनारा करना कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ रहा है एक बड़ा सवाल यह है कि क्या यह गुटबाजी का नतीजा है या सोची-समझी राजनीतिक दूरी? फिलहाल, जिलाध्यक्ष की सफाई के बाद भी कार्यकर्ताओं का असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है.

