धनबाद। झारखंड के धनबाद में सोमवार को आरोपी को पकड़ने को लेकर अधिवक्ता और कथित आरपीएफ कर्मियों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि सादे लिबास में पहुंचे चार-पांच लोगों ने पहले अधिवक्ता के चेंबर में घुसकर आरोपी को जबरन ले जाने की कोशिश की। बाद में न्यायालय जाते समय अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह के साथ मारपीट की गई। उनका गला दबाने, चश्मा तोड़ने और सोने की अंगूठी छीनने का भी आरोप है। घटना के बाद अधिवक्ताओं ने कथित आरपीएफ कर्मियों में से एक सब-इंस्पेक्टर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
चेंबर में घुसकर आरोपी को ले जाने की कोशिश
पीड़ित अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह के अनुसार, महुदा रेल थाना कांड संख्या 4/26 में आरोपी कुणाल साव की ओर से रेलवे के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आत्मसमर्पण की याचिका दाखिल की गई थी।
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे सादे लिबास में चार-पांच लोग उनके चेंबर में पहुंचे। उन्होंने खुद को आरपीएफ का सब-इंस्पेक्टर और जवान बताया तथा आरोपी कुणाल साव को जबरन अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। इस पर अधिवक्ताओं ने विरोध किया, जिसके बाद वे वहां से चले गए।
न्यायालय जाते समय अधिवक्ता पर हमला करने का आरोप
अधिवक्ता के मुताबिक, दोपहर करीब 1:30 बजे जब वह आरोपी कुणाल साव को लेकर न्यायालय जा रहे थे, तभी वही लोग दोबारा पहुंचे और आरोपी को घसीटकर ले जाने की कोशिश की। इस दौरान कथित आरपीएफ कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और गला दबा दिया। आरोप है कि हमले में उनका चश्मा टूट गया और हाथ से सोने की अंगूठी भी छीन ली गई।
अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान एक जूनियर महिला अधिवक्ता के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
अधिवक्ताओं ने एक कथित सब-इंस्पेक्टर को पकड़ा
घटना की जानकारी मिलते ही एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी, महासचिव जितेंद्र कुमार सहित कई अधिवक्ता मौके पर पहुंचे। इस दौरान मारपीट में शामिल बताए जा रहे एक कथित आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर को पकड़ लिया गया और थाने के सुपुर्द कर दिया गया।
समाचार लिखे जाने तक थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई चल रही थी। मामले में पुलिस की जांच और आधिकारिक पक्ष का इंतजार है।

