हेमंत शर्मा, इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक 2 नवंबर से इंदौर में शुरू होने जा रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत समेत देशभर से करीब 408 प्रतिनिधि शामिल होंगे। संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, संगठन विस्तार और सामाजिक मुद्दों के साथ इस बार युवाओं में बढ़ते नशीली दवाओं के चलन पर भी प्रमुखता से चर्चा होगी।
संघ की ओर से साफ किया गया है कि पिछले कई बैठकों में नशीली दवाओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा चुकी है। खास तौर पर युवा वर्ग में नशे की बढ़ती पहुंच को गंभीर सामाजिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में संघ सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जनजागरण अभियान चलाने की योजना पर काम करेगा।
देशभर से आएंगे 408 प्रतिनिधि, संगठन की दिशा पर होगा मंथन
इंदौर में आयोजित होने वाली इस बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी, 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। करीब 408 कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में तीन दिनों तक संगठनात्मक गतिविधियों और आने वाले समय की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बैठक से पहले अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेडकर ने संघ के संगठन विस्तार की जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, देशभर में वर्तमान में एक लाख एक हजार 151 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जबकि संघ का कार्य एक लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच चुका है। पिछले एक वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई शाखाएं जुड़ी हैं।
नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान की बनेगी रणनीति
संघ ने कहा कि नशीली दवाओं का बढ़ता चलन पिछले दो-तीन बैठकों से लगातार चिंता का विषय रहा है। विशेष रूप से युवा वर्ग पर इसके प्रभाव को देखते हुए परिवार और समाज के स्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत महसूस की गई है।
संघ की ओर से सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं से संपर्क कर इस मुद्दे पर चर्चा की गई है। आने वाले समय में विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से युवाओं को नशीली दवाओं से दूर रखने के लिए कई जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है।
संघ का कहना है कि समाज के सभी वर्गों तक सही तथ्य और विषयों का सही दृष्टिकोण पहुंचना जरूरी है, ताकि आम लोग मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सकें और उसके आधार पर आगे बढ़ सकें। संघ अपने कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से ऐसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की होगी समीक्षा
तीन दिवसीय बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों और गतिविधियों की समीक्षा भी की जाएगी। संघ के मुताबिक, शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए।
बैठक में संगठन विस्तार, सामाजिक बदलाव और पंच परिवर्तन जैसे विषयों पर भी देशभर से आए पदाधिकारी विचार-विमर्श करेंगे। आने वाले समय में संघ के कार्यक्रमों और अभियानों की रूपरेखा पर भी मंथन होगा।
सरसंघचालक के प्रवास और आगामी योजनाओं पर भी चर्चा
बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के आगामी प्रवास कार्यक्रमों की समीक्षा और योजना पर भी विचार किया जाएगा। शताब्दी वर्ष के दौरान उनके प्रवास में संवाद कार्यक्रमों का आयोजन प्रमुखता से किया गया था।
संघ के अनुसार, सरसंघचालक के विदेश प्रवास के दौरान हिंदुत्व की परिभाषा, भारत में हो रहे बदलावों और देश के सकारात्मक विकास को लेकर भी संवाद हुआ। भारत के उस विचार पर भी चर्चा की गई, जिसमें दुनिया के सभी लोग सुख और शांति के साथ रह सकें।
चुनावी वर्ष में संगठनात्मक बदलावों पर भी नजर
यह संघ का चुनावी वर्ष भी है। संगठनात्मक स्तर पर आगामी योजनाओं और बदलावों पर बैठक में विचार किया जाएगा। सह सरकार्यवाह का चुनाव मार्च में नागपुर में होने वाली बैठक में किया जाना है।
कुल मिलाकर इंदौर में होने जा रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह बैठक केवल संगठन विस्तार और शताब्दी वर्ष की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। युवाओं में बढ़ते नशीली दवाओं के चलन और उन्हें नशे से बचाने के लिए सामाजिक स्तर पर अभियान चलाने की रणनीति भी बैठक का अहम मुद्दा होगी।
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