Business Desk : भारतीय रुपया शुक्रवार, 30 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 95.19 के स्तर पर पहुंच गया। गुरुवार को रुपया 95.26 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये को कमजोर अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और एशियाई बाजारों में कमजोरी ने रुपये की बढ़त को सीमित रखा।
डॉलर में कमजोरी से रुपये को मिला सहारा
शुरुआती कारोबार में डॉलर इंडेक्स 0.27% गिरकर 101.75 पर आ गया। डॉलर में कमजोरी का फायदा रुपये समेत दूसरी मुद्राओं को मिला। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से भी रुपये को समर्थन मिला।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 116.09 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग में इजाफा हो सकता है। इसका दबाव रुपये पर पड़ता है।

रुपये की मजबूती का आम लोगों पर क्या असर होगा?
डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। उन्हें डॉलर खरीदने के लिए पहले के मुकाबले कम रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे आयातित सामान की लागत कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका असर तुरंत पेट्रोल-डीजल या अन्य सामान की कीमतों पर दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
वहीं, रुपये की मजबूती से अमेरिका जैसे देशों में सामान निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों की डॉलर में होने वाली कमाई का रुपये में मूल्य घट सकता है।

