Business Desk – Russia’s Gold Sale Details : एक तरफ भारत, चीन और पोलैंड जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपने रिजर्व बढ़ाने के लिए लगातार सोना खरीद रही हैं. दूसरी तरफ, रूस एक ऐसा देश है जिसने अकेले 2026 में 22,000 किलोग्राम सोना बेचा है.

यह रुझान 2025 से ही साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. हालांकि, इस स्थिति के पीछे के मूल कारणों को समझना बहुत जरूरी है. रूस के पास भारत के मुकाबले 2.6 गुना ज़्यादा सोने का रिजर्व है. इसके अलावा, रूस लगातार सोना उत्पादन करने वाले देशों की वैश्विक सूची में दूसरे या तीसरे स्थान पर बना रहता है.
रूस लगातार सोना क्यों बेच रहा है?
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के बारे में हर कोई जानता है. इस युद्ध ने रूस की अर्थव्यवस्था पर काफी असर डाला है, जिससे उसके बजट घाटे में काफी बढ़ोतरी हुई है. इस घाटे को कम करने के लिए, रूस लगातार अपने रिजर्व से सोना निकालकर बेच रहा है.
शुरू में वह सिर्फ कागजों पर (वित्तीय साधनों के जरिए) सोना बेचता था. हालांकि, 2025 में उसने पहली बार भौतिक रूप से सोना बेचा. आइए इसके कारणों को विस्तार से समझते हैं:
युद्ध के कारण बढ़ा बजट घाटा
यूक्रेन के साथ संघर्ष के दौरान, रूस को भारी सैन्य खर्च उठाना पड़ा है. नतीजतन, अकेले 2025 में बजट घाटा कई गुना बढ़ गया.
तेल और गैस से होने वाली कमाई पर असर
रूस पहले अपने तेल और गैस के निर्यात से काफी कमाई करता था. हालांकि, पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण, इन क्षेत्रों से होने वाली कमाई लगभग आधी रह गई है. फिर भी, मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अस्थायी तौर पर इनमें से कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है.
रूबल पर असर
रूबल रूस की राष्ट्रीय मुद्रा है. युद्ध पर अत्यधिक खर्च के कारण, रूबल लगातार कमजोर हो रहा है. नतीजतन, सरकार मुद्रा को मजबूत और स्थिर करने की कोशिश में सोना बेच रही है.
सोने की बढ़ती कीमतें
जनवरी के आखिर में खास तौर पर 29 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. यह तेजी फ़रवरी की शुरुआत तक बनी रही. रूस ने इस रुझान का काफी फायदा उठाया और अपने सोने के रिजर्व को इन ऊंची कीमतों पर बेचा.
हालांकि, यह भी ध्यान देने लायक बात है कि जहां रूस सोना बेच तो रहा है, लेकिन वह ऐसा घरेलू स्तर पर कर रहा है. यानी अपनी ही सीमाओं के भीतर बेच रहा है. इस तरह जनता से ज्यादा से ज्यादा रूबल अपने पास खींच रहा है.
यह रणनीति यह पक्का करती है कि युद्ध या इसी तरह के संकटों की स्थिति में देश को हथियारों जैसे खर्चों को पूरा करने के लिए करेंसी की कमी का सामना न करना पड़े. असल में देश का ज्यादातर सोना प्रभावी रूप से उसकी अपनी ही अर्थव्यवस्था में वापस घूम रहा होता है.
देश भारत सहित सोना खरीद रहे हैं
पिछले कुछ सालों में, कई देशों जिनमें भारत, चीन और पोलैंड शामिल हैं. सेंट्रल बैंकों ने अपने रिजर्व में रखे सोने की मात्रा में काफी बढ़ोतरी की है. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक विवादों के चलते चीन जैसे कई देश अब अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश में तेज़ी से सोना खरीद रहे हैं.
देशों के बीच सोने की इस बढ़ती खरीद का एक और अहम कारण यह है कि अमेरिका ने रूस की लगभग $300 अरब की संपत्ति फ्रीज कर दी थी. इस घटना से सबक लेते हुए खुद को भी ऐसी ही स्थिति से बचाने के लिए देश सक्रिय रूप से अपने सोने के रिजर्व को मजबूत कर रहे हैं. डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं.
रूस के लिए सोना खरीदना उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था पर बढ़ते आर्थिक दबाव को कम करने की एक कोशिश है. वहीं दूसरी ओर, दूसरे देशों के लिए, सोना खरीदना उनकी आर्थिक मजबूती और अमेरिकी डॉलर पर कम निर्भरता की चाहत का एक संकेत है.
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