Sachin Pilot Gyanesh Kumar: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजस्थान में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने रविवार को जयपुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। पायलट ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इसे ‘वोटबंदी’ बताते हुए कहा कि मतदान का अधिकार नागरिक का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अधिकार है।

पायलट बोले- ERO की शक्तियां केंद्रीकृत की जा रहीं

सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर से हटाकर केंद्रीकृत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर Electoral Registration Officer यानी ERO के स्तर पर होने वाली प्रक्रिया में दिल्ली से दखल दिया जा रहा है। पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर कई फैसले अपने स्तर पर लिए। उनके मुताबिक इससे निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता पर सवाल खड़े होते हैं।

13 करोड़ नाम हटाने का पायलट ने किया दावा

पायलट ने देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया। उन्होंने हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में चुनिंदा मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि पहले नोटबंदी हुई और अब ‘वोटबंदी’ की जा रही है। पायलट के मुताबिक मतदान का अधिकार किसी नागरिक से छिनना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर मामला है।

हालांकि, 13 करोड़ नाम पूरी तरह मतदाता सूची से हटाए जाने की बात को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाती है जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट हो सकते हैं। आयोग की प्रक्रिया में ऐसे नामों के संबंध में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का प्रावधान भी है।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर विवाद क्यों?

SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से सवाल कर रहा है। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा यह है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए या उनकी स्थिति को सत्यापन की प्रक्रिया में रखा गया। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सेवाओं के लिए आधिकारिक पोर्टल उपलब्ध है, जहां मतदाता अपना नाम खोज सकते हैं और मतदाता सूची से जुड़े आवेदन तथा सुधार की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

CEC पर फैसले अकेले लेने का आरोप

पायलट ने चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय ढांचे का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि आयोग में फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों को दरकिनार किया। यह आरोप ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के कामकाज और SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। एक याचिका में CEC की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

चुनाव आयोग पर भरोसे का मुद्दा उठा रहे पायलट

सचिन पायलट ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता को लेकर जनता के मन में भरोसा बना रहना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रक्रिया से इस भरोसे को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा सिर्फ कांग्रेस या विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि आम मतदाता के अधिकार से जुड़ा है। पायलट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच कार्रवाई की मांग भी की।

विवाद के बीच आयोग ने मतदाता सेवाओं पर जोर दिया

चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 से जुड़ी मतदाता सूची और नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के अनुसार मतदाता अपने नाम की स्थिति देख सकते हैं और मतदाता सूची में पंजीकरण या सुधार के लिए निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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