कुमार इंदर, ​जबलपुर। Sagar Liquor Scandal: मध्य प्रदेश के चर्चित सागर शराब कांड मामले में जबलपुर स्थित हाई कोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) का निराकरण यानी डिस्पोज ऑफ कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता अपने सभी मुद्दे और पक्ष, राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक आयोग के समक्ष रख सकते हैं।

दरअसल, सागर शराब कांड के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग का गठन किया था। याचिकाकर्ता एडवोकेट वैभव सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में जिन प्रमुख बिंदुओं और मांगों को उठाया गया था, उनमें से लगभग सभी मुख्य मांगों पर सरकार द्वारा कदम उठाए जा चुके हैं। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।

PIL में क्या-क्या थी मांग ?

​स्वतंत्र जांच एजेंसी की मांग: रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन।

​अधिकारियों पर कार्रवाई: सागर कलेक्टर और SP का तत्काल ट्रांसफर, साथ ही अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत की जांच।

​क्लीन चिट पर सवाल: संदिग्ध शराब ‘सागर गोल्ड’ और ‘बॉम्बे व्हिस्की’ के स्टॉक को कथित तौर पर दी गई क्लीन चिट की जांच।

​जवाबदेही: पूर्व में मिली शिकायतों पर कार्रवाई न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।

​कड़े नियम: अवैध व मिलावटी शराब के नेटवर्क पर शिकंजा कसना और भविष्य के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी करना।

इस जनहित याचिका में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), आबकारी आयुक्त, सागर कलेक्टर, सागर SP, जिला आबकारी अधिकारी और स्थानीय बंडा थाना प्रभारी को पक्षकार बनाया गया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सागर शराब कांड से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्य, दस्तावेज और आपत्तियां न्यायिक आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी, जिससे जांच की भावी दिशा तय होगी।

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