साहिबगंज। गंगा नदी के तेज कटाव से गंभीर खतरे में पड़े साहिबगंज-बड़हरवा रेलखंड की डाउन लाइन को आखिरकार सुरक्षित कर लिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 29 सितंबर से इस मार्ग पर ट्रेनों का संचालन बंद किया गया था। लगातार एक सप्ताह तक चले युद्धस्तर के मरम्मत कार्यों के बाद, 6 अक्टूबर को पहली ट्रेन (संख्या 03428 साहिबगंज-हावड़ा पैसेंजर स्पेशल) इस ट्रैक से सफलतापूर्वक निकाली गई। रेलवे के अनुसार, 7 अक्टूबर से इस रूट पर सभी ट्रेनें अपने सामान्य और निर्धारित समय-सारणी के अनुसार चलना शुरू हो गई हैं।

​800 से अधिक कर्मियों की दिन-रात मेहनत

​इस चुनौतीपूर्ण अभियान को सफल बनाने के लिए मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में 800 से अधिक रेलवे कर्मचारियों, अधिकारियों और ठेका मजदूरों ने चौबीसों घंटे काम किया। बिना किसी बड़े नुकसान के इस संकट से निपटने के लिए टीम ने दिन-रात एक करके तटबंध को मजबूत किया और ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया।

​200 से अधिक वैगनों से डाले गए बोल्डर

​कटाव रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सामग्री का इस्तेमाल किया गया। संवेदनशील हिस्सों में नदी के बहाव को रोकने के लिए 200 से अधिक वैगनों के जरिए भारी मात्रा में बोल्डर, रेलवे स्लीपर और स्टोन डस्ट पहुंचाए गए। इन उपायों से गंगा की तेज धारा का सीधा प्रभाव तटबंध पर पड़ना बंद हो गया और रेल मार्ग को अतिरिक्त मजबूती मिली।

​पोरक्यूपाइन और गेबियन बॉक्स से थमी पानी की रफ्तार

​पारंपरिक तरीकों के अलावा आधुनिक तकनीकी संरचनाओं का भी खुलकर इस्तेमाल किया गया:

  • ​पोरक्यूपाइन संरचनाएं: पानी की तीव्र गति को तोड़ने और तलछट जमा करने के लिए त्रिकोणीय पिरामिडनुमा यह संरचनाएं लगाई गईं।
  • ​गेबियन बॉक्स और क्रेट्स: तार-जाल के इन बक्से में पत्थर भरकर मजबूत दीवार तैयार की गई, जिससे मिट्टी का कटाव रुक गया।

​यात्रियों को मिली बड़ी राहत

​डाउन लाइन के पूरी तरह सुरक्षित होने और सामान्य परिचालन बहाल होने से यात्रियों ने राहत की सांस ली है। जो ट्रेनें पिछले एक हफ्ते से डायवर्टेड या नियंत्रित रूट पर चल रही थीं, वे अब अपने पुराने सामान्य मार्ग पर लौट आई हैं। इस सफल अभियान ने एक बड़े रेल संकट को टाल दिया है।