लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में पूर्व आईएएस राम बहादुर पासी, कुशाग्र शाक्य, विनोद शाक्य और अन्य नेताओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. अखिलेश ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, आरक्षण और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा.

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान विभिन्न दलों से आए नेताओं का स्वागत किया. इस दौरान पूर्व आईएएस राम बहादुर पासी, कुशाग्र शाक्य, बदायूं के विनोद शाक्य और बहुजन समाज पार्टी से जुड़े राम बहादुर पाल समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सपा की सदस्यता ग्रहण की.

अखिलेश यादव ने नए सदस्यों के पार्टी में आने को उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया. उन्होंने कहा कि इन जॉइनिंग से पूरब से पश्चिम तक राजनीतिक हलचल हुई है. नए साथियों को पीडीए का मजबूत स्तंभ बताते हुए उन्होंने आगामी चुनावों में बड़ी जीत का भरोसा जताया.

वाल्मीकि जयंती पर छुट्टी का ऐलान

अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर अवकाश दिया जाएगा. उन्होंने आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने और सफाई कर्मचारियों के हित में विशेष घोषणा करने की बात भी कही.

सपा अध्यक्ष ने गरीब परिवारों को उनके घरों का मालिकाना हक दिलाने का वादा किया. उन्होंने कहा कि जिन गरीब परिवारों के पास अपना घर नहीं है, उनके लिए अलग से आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी.

मतदाता सूची पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में धांधली की जा रही है और एक ही नाम की प्रविष्टियां कई जिलों में सामने आ रही हैं.

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और किसी अपात्र नाम को शामिल न किया जाए. अखिलेश ने मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने और मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की मांग की. उन्होंने पहचान पत्र की नकल तैयार करना मुश्किल बनाने की जरूरत भी बताई.

सपा अध्यक्ष ने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया. उन्होंने मतदाता सूची में कई प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए आयोग से तकनीक की मदद से कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की.

कानून-व्यवस्था और आरक्षण का मुद्दा

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ हत्याओं के पीछे के कारणों की जानकारी नहीं है, लेकिन उनके अनुसार देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति सबसे खराब है.

उन्होंने आरक्षण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए टीजीटी भर्ती का भी जिक्र किया. अखिलेश ने भाजपा पर चुनाव के दौरान घुसपैठ का मुद्दा उठाने और सीमाओं की सुरक्षा के मामले में विफल रहने का आरोप लगाया. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में चीन की घुसपैठ से जुड़ी खबरों का भी उल्लेख किया.

विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर जोर

अखिलेश यादव ने कहा कि वह विपक्षी गठबंधन को मजबूत करना चाहते हैं. उन्होंने भाजपा को उत्तर प्रदेश की सत्ता से हटाने के लिए मिलकर काम करने की बात कही. सपा अध्यक्ष के मुताबिक, उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है.

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की अपील की. अखिलेश ने यह भी कहा कि भाजपा के जो विधायक समाजवादी पार्टी से टिकट चाहते हैं, उन्हें उनके पास लाया जाए.

बदायूं में संगठन विस्तार का दावा

अखिलेश यादव ने कुशाग्र सागर के सपा में शामिल होने को पार्टी के लिए मजबूती देने वाला कदम बताया. उन्होंने कहा कि विनोद शाक्य ने बदायूं के दातागंज और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों को जोड़ने में भूमिका निभाई है.

बसपा से आए दारा सिंह प्रजापति ने कहा कि वह किसी लाभ की अपेक्षा से नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के लिए काम करने आए हैं. इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि सपा कांशीराम के विचारों पर चल रही है. उन्होंने दारा सिंह प्रजापति का जिक्र करते हुए कहा, “जिनके साथ दारा होंगे, अखाड़ा वही जीतेंगे.” राम नाम का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह भी कहा, “जिनके नाम में राम जुड़ा हो, उनके बन जाएंगे सब काम.”

शिवपाल यादव और सलीम शेरवानी का बयान

सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने कहा कि पार्टी में आगे भी दूसरे दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल होते रहेंगे. उन्होंने सरकार पर देश को बांटने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. शिवपाल ने नए सदस्यों को भरोसा दिलाया कि पार्टी में उन्हें निराश नहीं होने दिया जाएगा.

पूर्व सांसद सलीम शेरवानी ने बदायूं की सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी की जीत का दावा किया. प्रेसवार्ता में अमेरिका से आईं शमीना प्रवीन ने कहा कि उनकी इच्छा है कि दूसरे देश भारत को विश्व गुरु के रूप में मानें.