समाजवादी पार्टी ने नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर से पार्टी की मुख्यधारा में लाने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाने की रणनीति बनाई है. इसके तहत वरिष्ठ पदाधिकारी जिलों में जाकर असंतुष्ट नेताओं से मिलेंगे और जरूरत पड़ने पर उनकी बात पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाएंगे.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारी के बीच समाजवादी पार्टी ने नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर से संगठन से जोड़ने की रणनीति बनाई है. इसके तहत पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात करेंगे और उनकी शिकायतें सुनेंगे.

जिलों में जाएंगे वरिष्ठ नेता

पार्टी की योजना के मुताबिक, वरिष्ठ और प्रभावशाली पदाधिकारियों को अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी दी जाएगी. ये नेता उन कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे, जो किसी कारण से पार्टी नेतृत्व या संगठन से नाराज हैं.

इस पहल का उद्देश्य उनकी समस्याओं को सुनना, उनकी शिकायतों को दूर करने का प्रयास करना और उन्हें दोबारा पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय करना है. जरूरत पड़ने पर ये पदाधिकारी नाराज नेताओं की सीधे पार्टी नेतृत्व से बातचीत भी कराएंगे.

पिछले चुनाव से सबक

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए यह रणनीति तैयार की है. सूत्रों का कहना है कि पिछले चुनाव में कुछ सीटों पर पार्टी के भीतर नाराजगी और असंतुष्ट नेताओं को समय रहते नहीं मना पाने से नुकसान हुआ था.

कई सीटों पर मुकाबला करीबी रहा और पार्टी को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले. ऐसे में सपा इस बार चुनाव से पहले संगठन के भीतर मतभेद दूर करने और नाराज नेताओं को साथ लाने पर जोर दे रही है.

इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी असंतुष्ट नेताओं की शिकायतों को किस हद तक दूर कर पाती है और उन्हें संगठन में दोबारा सक्रिय करने में कितनी कामयाब होती है.