अहमदाबाद। गुजरात की जीवनरेखा माना जाने वाला सरदार सरोवर नर्मदा बांध अपनी अधिकतम जल भराव क्षमता के बेहद करीब पहुंच गया है। बांध का जलस्तर 138.50 मीटर दर्ज किया गया है, जो इसके पूर्ण भराव स्तर से महज 18 सेंटीमीटर कम है। मध्य प्रदेश के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से हो रही लगातार पानी की आवक (लगभग 13,610 क्यूसेक) के कारण बांध में पानी का संग्रह तेजी से बढ़ा है। इस खबर से प्रदेशवासियों को आने वाले दिनों में जल संकट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

राज्य में मानसून की मिली-जुली स्थिति के बावजूद जलस्रोतों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। राज्य के कुल 207 प्रमुख जलाशयों में से लगभग 56 प्रतिशत यानी 117 बांध अपनी पूर्ण क्षमता (100% से अधिक) तक भर चुके हैं। जलभराव के मामले में सौराष्ट्र क्षेत्र सबसे आगे रहा है, जहाँ के सबसे अधिक 82 बांध पूरी तरह लबालब हो चुके हैं। अन्य क्षेत्रों में भी बांधों का जलस्तर बढ़ा है, जिससे आगामी रबी सीजन के लिए सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता सुगम होगी।

हालाँकि, एक तरफ जहाँ मुख्य बांध भर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई इलाकों में कम बारिश चिंता का कारण बनी हुई है। बारिश के इस असमान वितरण को लेकर राजनीति भी गरमाने लगी है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य के कई जिलों में सूखे की स्थिति का दावा करते हुए सरकार से राहत पैकेज और सूखा घोषित करने की मांग की है।

आप महासचिव मनोज सोरठिया ने पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात के कम वर्षा वाले जिलों को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित किया जाना चाहिए। पार्टी के नेताओं ने घोषणा की है कि वे 2 अक्टूबर को गांधीनगर कूच करेंगे और सरकार के समक्ष आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित करने की अपनी मांग रखेंगे। कुल मिलाकर, राज्य में एक तरफ जल सुरक्षा की राहत है तो दूसरी तरफ कम बारिश वाले क्षेत्रों में राहत कार्य चलाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है।
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