अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। बिहार के रोहतास जिले अंतर्गत करगहर प्रखंड से बाल विकास परियोजना विभाग (ICDS) में महिला पर्यवेक्षिका का आंगनवाड़ी सेविका से खुलेआम रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

​वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?

​संबंधित वायरल वीडियो गुरुवार का बताया जा रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक आंगनवाड़ी सेविका महिला पर्यवेक्षिका प्रभा सिंह के कार्यालय में मौजूद है। वह एक कागज में लपेटकर रुपए (कैश) प्रभा सिंह को सौंपती है। रुपए मिलने के बाद महिला पर्यवेक्षिका उसे खोलकर गिनती और जांचती हुई भी नजर आ रही हैं। हालांकि, लेन-देन के दौरान पर्यवेक्षिका को यह आशंका हो जाती है कि कोई उनका वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है, जिस पर वे सेविका को टोकती भी हैं।

(नोट: यह खबर वायरल वीडियो के आधार पर आधारित है, वीडियो की सत्यता की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी।)

​आरोपी पर्यवेक्षिका ने बताया साजिश

​मामला उजागर होने के बाद जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (DPO) आईसीडीएस, विनीता कुमारी ने कार्रवाई की है। उन्होंने आरोपी महिला पर्यवेक्षिका प्रभा सिंह को उनके वर्तमान कार्यक्षेत्र (सेक्टर) से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) कार्यालय, करगहर के मुख्यालय के अधीन रहने का निर्देश जारी किया गया है। दूसरी ओर, आरोपी महिला पर्यवेक्षिका प्रभा सिंह ने खुद पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ रची गई एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

​​डीपीओ विनीता कुमारी

दो सदस्यीय जांच टीम का गठन

​डीपीओ विनीता कुमारी ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। इस टीम में करगहर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) को शामिल किया गया है। जांच टीम स्थल पर पहुंचकर मामले की पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी। जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

​आंगनवाड़ी केंद्रों में भ्रष्टाचार का पुराना सिलसिला

​उल्लेखनीय है कि रोहतास जिले समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन, पोषाहार वितरण और निरीक्षण के नाम पर लगातार अवैध वसूली और बंदरबांट की शिकायतें आती रहती हैं। स्थानीय स्तर पर इस तरह के मामले सामने आने से विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।