शिवम मिश्रा, रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, ओमान में प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया के दौरान सौरभ चंद्राकर ने खुद को वानुआतु (Vanuatu) का नागरिक बताया था। उसने दावा किया था कि वह वर्ष 2020 में ही भारतीय नागरिकता छोड़ चुका है और इसके लिए भारतीय दूतावास में निर्धारित प्रक्रिया भी पूरी की थी।

सौरभ चंद्राकर से जुड़े इस दावे ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले की जांच को एक नया पहलू दे दिया है। हालांकि, भारतीय नागरिकता छोड़ने और वानुआतु का नागरिक होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
दिल्ली की अदालत में गिरफ्तारी को दी चुनौती
ओमान से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद CBI ने 2 नवंबर 2026 को सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। विशेष न्यायाधीश निखिल चोपड़ा की अदालत में CBI ने उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर देने की मांग की।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए प्रत्यर्पण की शर्तों का हवाला दिया। वकीलों ने दलील दी कि ओमान की अदालत ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार करते हुए ED के मामले में प्रत्यर्पण की अनुमति दी थी, जबकि CBI के अनुरोध को मंजूरी नहीं दी गई थी।
बचाव पक्ष ने कहा कि ओमान के प्रत्यर्पण आदेश में स्पष्ट शर्त थी कि आरोपी को उस अपराध के अलावा किसी अन्य पुराने अपराध के लिए दंडित नहीं किया जा सकता, जिसके आधार पर उसका प्रत्यर्पण किया गया है। इसके लिए बचाव पक्ष ने एक्सट्रैडिशन एक्ट की धारा 21 और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया।
CBI ने गिरफ्तारी को बताया वैध
वहीं CBI की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध किया। CBI ने कहा कि आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत से ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी था। एजेंसी ने यह भी दलील दी कि ओमान की अदालत के आदेश की जो प्रति बचाव पक्ष ने पेश की है, वह प्रमाणित या अधिकृत प्रति नहीं है।

CBI ने कहा कि उसके पास भी प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध करने और ओमान सरकार से समन्वय करने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी थी। एजेंसी के मुताबिक, CBI का मामला मूल अपराध से संबंधित है और ED का मामला भी इसी अनुसूचित अपराध से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि फिलहाल उसके समक्ष आरोपी की ट्रांजिट रिमांड का सवाल है। प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत आरोपी पर CBI के मामले में मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं, इस पर फैसला रायपुर की संबंधित विशेष अदालत करेगी।
अदालत ने सौरभ चंद्राकर की दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर करते हुए उसे 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण की शर्तों और मुकदमे की वैधता से जुड़े सवालों पर निर्णय संबंधित ट्रायल कोर्ट को करना है।
ओमान में अवैध प्रवेश के आरोप में हिरासत में लिया गया था
अदालत के आदेश के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर को ओमान में कथित तौर पर फर्जी यात्रा दस्तावेजों के आधार पर अवैध प्रवेश के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद ओमान सरकार ने उसे भारत को सौंप दिया। CBI ने उसे 1 नवंबर 2026 को शाम 7:35 बजे गिरफ्तार किया था।
गौरतलब है कि महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क संचालित करने का आरोप सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल पर है। CBI के मुताबिक, इस सिंडिकेट के जरिए पैनल और ब्रांच ऑपरेटरों के माध्यम से सट्टेबाजी कराई जाती थी और अवैध कमाई को विभिन्न बैंक खातों के जरिए विदेश भेजा जाता था।
अब सौरभ चंद्राकर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसके खिलाफ दर्ज मामलों और प्रत्यर्पण की शर्तों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे की सुनवाई होगी।
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