हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में राहुल गांधी के संभावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। पुलिस ने वीआईपी (VIP) सुरक्षा के मद्देनजर जस्टिस जे.एस. वर्मा आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए आयोजकों पर सख्त सुरक्षा मानक लागू कर दिए हैं।

क्या है वर्मा आयोग का मामला?

ऐतिहासिक संदर्भ: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए गठित जस्टिस जे.एस. वर्मा आयोग ने राजनीतिक रैलियों और आयोजनों के लिए सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन के कड़े दिशा-निर्देश तय किए थे। सुरक्षा का आधार: पुलिस प्रशासन अब उन्हीं ऐतिहासिक मानकों को आधार बनाकर वीआईपी मूवमेंट और जनसभाओं की सुरक्षा समीक्षा कर रहा है।

प्रमुख सुरक्षा आवश्यकताएं व निर्देश

सख्त बैरिकेडिंग: भीड़ को वीआईपी घेरे से दूर रखने के लिए मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग अनिवार्य। क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ नियंत्रण): एंट्री-एग्जिट पॉइंट और क्षमता से अधिक भीड़ न जुटने देने के लिए पुख्ता प्लान। आयोजकों की जवाबदेही: कार्यक्रम के दौरान किसी भी चूक के लिए स्थानीय आयोजकों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। अनुमति पर तलवार: यदि तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ, तो कार्यक्रम की अनुमति रद्द या संशोधित भी की जा सकती है। प्रशासन के इस सख्त रुख से राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है, और आयोजक सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूरा करने में जुटे हैं।

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