पटना नगर निगम ने आगामी सर्दियों के मौसम में एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है। शहर में ठंड के दौरान अब खुले में अलाव नहीं जलाए जाएंगे। हाल ही में एयर पॉल्यूशन एक्शन ग्रुप (A-PAG) और नगर निगम द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई है कि खुले में अलाव जलाने से हवा में खतरनाक PM2.5 का स्तर करीब 18 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इससे वायु प्रदूषण तो बढ़ता ही है, साथ ही बुजुर्गों, बच्चों और संवेदनशील आबादी के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में पटना ने अपनी स्थिति में सुधार करते हुए 27वें स्थान से छलांग लगाकर 16वां स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि को बनाए रखने और प्रदूषण को और अधिक नियंत्रित करने के लिए निगम ने यह सख्त कदम उठाया है।
आश्रय स्थलों पर हीटर व्यवस्था
नगर निगम के आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, पटना में कुल 18 आश्रय स्थल संचालित किए जाते हैं। इनमें 6 स्थायी आश्रय स्थल, 12 जर्मन हैंगर और 8 स्थानों पर विशेष टेंट शामिल हैं, जहां सर्दियों में जरूरतमंदों के लिए कुल 955 बेड की व्यवस्था की जाती है। यहां पहले से ही पेयजल, शौचालय, बिस्तर और कंबल जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलती हैं।
इस बार ठंड से राहत देने के लिए इन सभी आश्रय स्थलों पर पारंपरिक अलाव के बजाय आधुनिक हीटर और ब्लोअर की संख्या में भारी बढ़ोतरी की जाएगी। इससे लोगों को पर्याप्त गर्माहट भी मिलेगी और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।
गिग वर्कर्स के लिए विंटर-रेडी एसी लाउंज
सड़क किनारे ठंड से बचने के लिए अलाव जलाने की मजबूरी को कम करने के उद्देश्य से नगर निगम गिग वर्कर्स पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। वर्तमान में पटना में गिग वर्कर्स के लिए दो स्थानों पर एसी लाउंज की सुविधा उपलब्ध है। निगम अब इन लाउंज को सर्दियों के अनुकूल यानी ‘विंटर-रेडी’ बनाने की योजना पर काम कर रहा है। मांग और जरूरत के अनुसार ऐसे लाउंज की संख्या भविष्य में और बढ़ाई जाएगी, ताकि डिलीवरी बॉय और अन्य रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षित और गर्म माहौल मिल सके।



