पाकिस्तान ने अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते 7 भारतीय कैदियों को रिहा किया है। खास बात यह है कि इसमें जालंधर और लुधियाना के दो युवक शामिल हैं जो करीब ढाई साल पहले सतलुज दरिया में बहकर पाकिस्तान पहुंचे थे।
पहले इन पर ड्रग तस्करी का आरोप लगा लेकिन उसके बाद उन्हें रिहा करने की खबर समाने आई। अपने घर के लोगो के रिहाई की खबर से उनके परिजन में खुशी की लहर है। जानकारी के अनुसार चंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, जोगिंदर सिंह, हरविंदर सिंह, विशाल, रतनपाल और सुनील नाम के भारतीय कैदियों को पाकिस्तान को रिहा किया है, जिनमें हरविंदर सिंह पुत्र मुख्तियार सिंह निवासी परजियां बिहारीपुर (लुधियाना) और रतनपाल पुत्र महिंदर सिंह निवासी खैरा मुस्तरका थाना मेहतपुर (जालंधर) शामिल हैं।

ये दोनों उन छह भारतीयों में शामिल थे जिन्हें जुलाई 2023 में पाकिस्तानी अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुरू में उन पर ड्रग तस्करी का आरोप लगाया था, जबकि उनके परिवारों ने कहा कि वे दरिया में बाढ़ आने के कारण बहकर पाकिस्तान चले गए थे। जानकारी के अनुसार लाहौर की एक अदालत ने 13 दिसंबर, 2025 को उनकी रिहाई और वापस भेजने का आदेश दिया था। दरिया में बहकर पाकिस्तान पहुंचने पर उन्हें बॉर्डर रेंजर्स ने पकड़ लिया था और ढाई साल जेल की सज़ा काटने के बाद उन्हें रिहा किया गया।
इसके बाद प्रशासन ने कल, शुक्रवार को परिवार को उनकी रिहाई की जानकारी दी और रिहा हो रहे कैदियों ने भी परिवार को टेलीफोन पर अपनी रिहाई की जानकारी दी और उन्हें शनिवार को अटारी-वाघा बॉर्डर पहुंचने की जानकारी दी। आज पाकिस्तानी अधिकारियों ने अपनी कार्रवाई पूरी करने के बाद कैदियों को उनके परिवारों को सौंप दिया।
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