भुवनेश्वर: ओडिशा के सरकारी, सहायता प्राप्त और ब्लॉक-ग्रांट सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और सहायता कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है। सैकड़ों स्वीकृत पद खाली होने से राज्यभर के स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि, राज्य सरकार ने इस अंतर को पाटने और शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर भर्ती प्रक्रियाएं शुरू कर दी है।
शुक्रवार को विधानसभा सत्र के दौरान जटणी के विधायक विभूति भूषण बलवंतराय द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में विद्यालय एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने रिक्त पदों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया और उन्हें भरने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। मंत्री के अनुसार, राज्य के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों की स्थिति चिंताजनक है, जिसे दूर करने के लिए लोक सेवा आयोग और अन्य भर्ती एजेंसियों के माध्यम से त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में पदों की स्थिति इस प्रकार है:
कुल 1,734 स्वीकृत शिक्षक पदों में से 358 पद खाली पड़े हैं। इन पदों को भरने के लिए ओडिशा लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त, 193 अपग्रेड किए गए उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए 1,342 नए शिक्षक पदों का सृजन किया जा रहा है।
230 सरकारी व्यावसायिक स्कूलों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां जूनियर लेक्चरर के 70, सीनियर क्लर्क के 116, जूनियर क्लर्क के 143 और चपरासी के 168 पद खाली हैं। 499 ब्लॉक-ग्रांट सहायता प्राप्त स्कूलों में स्वीकृत 3,116 लेक्चरर पदों में से 302 पद रिक्त हैं। पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अतिथि व्याख्याताओं की सेवाएं ली जा रही हैं।
मंत्री नित्यानंद गोंड ने सदन को आश्वासन दिया कि पूरी तरह से सहायता प्राप्त हाई स्कूलों में शिक्षकों के 1,652 पदों को भरने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है। सरकार का मुख्य लक्ष्य पारदर्शी और त्वरित भर्ती के जरिए राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना और स्कूलों के प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाना है।
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